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सुप्रीम कोर्ट का कांग्रेस को आदेश

भारत के इंजीनियरों खास कर सिविल इंजीनियरों के लिए बहुत बड़ी खबर, बीजेपी सरकार के नदियों के जोडने की जिस महा परियोजना को कांग्रेस ने लागू करने से मना कर दिया था, भारत की सुप्रीम कोर्ट ने उसे तुरंत बिना देरी किये चरणबद्ध तरीके से लागू करने का आदेश दे दिया.

इससे ये साबित होता है की भारत में बेरोजगारी और गरीबी फैलाने की जिम्मेदारी कांग्रेस की ही बनती है ...क्यों???? इसे पढ़कर जान जायेंगे.....

१- जब भारत में सबसे ज्यादा बेरोजगारी थी , उस समय सत्ता बीजेपी के पास आयी थी और बीजेपी सरकार ने (१) महामार्गो के विस्तारीकरण, (२) हाऊसिंग प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा और (३) भारत की प्रमुख नदियों को आपस में वैज्ञानिक तरीके से जोडने की महायोजना बनाकर विकास का खाका तैयार किया था जिसमे पहली दो परियोजनाओ पर अमल तो बीजेपी ने खुद किया लेकिन तीसरे महायोजना में विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट आनी बाकि थी की बीजेपी की सरकार को गिरा दिया गया और मिडिया ने विदेशी पैसे के मदद से बीजेपी को बदनाम कर दिया.

२-नदी को जोडने की यह महापरियोजना ५,००,००० करोड की थी और सरकार ने इसके लिए धन उपलब्ध करने की गारंटी भी दी थी. इसमे धन की कोई बात ही नहीं थी, इसका अंदाजा इससे लगता है भारत की सरकार ने पिछले वित्तवर्ष में भारत की १२१ करोड जनता के लिए मात्र १,४०,००० करोड की सब्सिडी डी जबकि लुटेरी कंपनियों को हमारे टैक्स का ४, ६०,००० करोड सब्सिडी दे डाली, इसका जबाब लेने वाला कोई नहीं है, भारत की भांड मिडिया तो कांग्रेस और विदेशी कंपनियों को पहले ही बिक चुकी है.

३-रही बात तकनीक की हमारे पास एल एंड टी जैसी विश्व की सर्वश्रेष्ठ कम्पनिया है जो हर प्रकार की इंजीनियरी में माहिर है. सिर्फ राजनैतिक इमानदारी और राष्ट्रवादी कटिबद्धता की आवश्यकता है. भारत में अब इंजीनियरों की भी कमी नहीं है और हमारे पास आधुनिकतम तकनीकी के साथ साथ विश्वस्तरीय प्रबंधकों की कमी नहीं है, लेकिन हमारी वर्तमान सरकार हमारे टेक्नोक्रेट को पता नहीं क्यों महत्त्व नहीं देती है, टीम लीडर भी चाहिए तो विदेशी ही होना चाहिए, खैर.....

४-भारत सरकार के पैसे इधर उधर के ऐसे मदों में और ऐसे तरीके से खर्च किया जा रहे है, जिससे की आगे आने वाली सरकारे विद्रोह का सामना करने के लिए बाध्य हो जाये और वही लुट का ढर्रा कायम रखने के लिए मजबुर् हो. जैसे सिर्फ मनारेगा और मिड दे मील में ही १,००,००० करोड से ज्यादा का कोष हर साल खर्च हो जा रहा है लेकिन रिजल्ट क्या है, सिर्फ कमाई और लूट...जिससे पूंछो वही इसे बंद करके सीधे माँ बाप के खाते में पैसा डालने के लिए सुझाव देता है... यह देश की किस्मत है...मनारेगा की लूट कितनी हो रही है यह कांग्रेस के दिग्गजों को भी अंदाजा नहीं है...

५- लेकिन भारत के कुछ लाल है जिन्हें भारत की चिंता है जिसमे मुख्यन्यायाधीश कपाडिया जि भी शामिल है और उन्होंने नदी परियोजना को तुरंत चरणबद्ध तरीके से लागू करने का आदेश दे दिया है, अब देखना हे की कांग्रेस के पास इसे न लागू करने के क्या क्या तर्क और बाकि हैं, कांग्रेस की सबसे बड़ी खासियत यह है की यह पार्टी बड़ी सुनियोजित तरीके से समय बरबाद करती है जो यह पिछले ६४ सालो से यही करती आयी है.

६- कांग्रेस सरकार जहा सरकार के लिए पैसा कमा सकती है वहा उसे लुटा देती है जैसे १,७६,००० करोड और कमा सकते थे २जी में लेकिन उसे फ्री में बेच डाला. परन्तु जो चीजे बढ़िया क्वालिटी का सस्ते में खरीद सकते है वहा जनता का पैसा विदेशी कंपनियों को लुटा डालते है जसे (१)एअर इण्डिया के लिए ५०००० करोड का विमान का सौदा एक ही बार में कर डाला और इसमे २०००० करोड ज्यादा भुगतान हुआ, (२) सेना के लिए १२६ युद्धक विमानो की निम्न श्रेणी ५२,००० करोड में लेने का सौदा कर लिया है जिसे स्वयं अमेरिका के राष्ट्रपति ने कह दिया की ये विमान २५ करोड की कीमत के है. ज्ञात हो फ़्रांस के इन विमानों का भारत पहला खरीददार है, (३) इटली से १२ हेलीकाप्टर जिनकी कीमत २०-२५ करोड से ज्यादा नहीं होगी उसके लिए ३५०० करोड भुगतान करके अपना हिस्सा ले लिया गया और अब इटली की सरकार ने उस पर जांच बैठने की बात कही है (४) फ़्रांस की अरेवा कंपनी को १,००,००० करोड का ठेका परमाणु ऊर्जा का ऐसा प्लांट लगाने के लिए दे डाला है जो तकनीक पुर्री दुनिया में कही अपनाई ही नहीं गयी है और ऐसे ही ८ और प्लांट लगाने के फिराक में है, जबकि भारत को सूर्य ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जैतापुर -महाराष्ट्र के इसी प्लांट को रुकवाने वाले किसानो को पुलिस ने गोलियों से भून डाला था.

७-जहा भारत में पूंजी की कमी का बहाना बनाकर बेरोजगारों की फ़ौज खडी की जा रही है, वही भारत का पूरा पैसा विदेशी कम्पनिया अपने देश में ले जाकर ५ का पचीस वसूल करके अपने लोगो को रोजगार दे रही है, गुस्सा इसी बात की ज्यादा है की १४ घंटे काम करने वाले भारतीय बेरोजगार क्यों है जब की भारत में ही सबसे ज्यादा १२१ करोड ग्राहक भी हैं.

जो भी हो, २०१४ में हमारे भाइयो को एक खुशखबरी और मिलेगी की कांग्रेस सत्ताविहीन होकर समाप्त भी होने जा रही है. बहार हाल हम अब नदियों को जोडने की तैयारी शुरू कर दे, जिससे इस महान देश भारत का और विकास सुनिश्चित किया जा सके.

जय भारत
(अयोध्या से संजय कुमार मौर्य का लेख)

सत्यवादी पाकिस्तान

पाकिस्तान की सत्यवादिता एक बार फिर प्रमाणित हो गई है। एबटाबाद स्थित ओसामा बिन लादेन के गुप्त आवास का पता बताने वाले एक पाकिस्तानी मूल के डॉक्टर के विरुद्ध न केवल मुकद्दमा दर्ज़ किया गया है अपितु उसकी सारी चल-अचल सम्पत्ति भी सरकार ने छिना ली है।( भारत सरकार को पाकिस्तान से यह सबक लेना चाहिये। हमारे यहाँ तो भृष्ट से भृष्ट व्यक्ति की भी सम्पत्ति कभी राजसात नहीं होती ) उस पर आरोप है कि उसने लादेन का पता लगाने के लिये टीकाकरण के बहाने से एक गुप्त अभियान चलाया था। 
इससे एक बात पाकिस्तान ने खुद प्रमाणित कर दी है कि उसने लादेन को संरक्षण दे रखा था और इस मामले में वह पूरे विश्व को बेवकूफ बनाता रहा था. यह भी प्रमाणित हो गया है कि पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों का केन्द्र रहा  है। किंतु भारत सरकार पाकिस्तान के इस कंफेशन को शायद स्वीकार नहीं करेगी। स्वीकार करने की स्थिति में उस पर कसाब को फांसी देने का दबाव बढ जायेगा। 

सोनिया गाँधी इतनी रहस्यमय क्यों ?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक बार फिर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को निशाने पर लिया है। संघ ने आरोप लगाया है कि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने सार्वजनिक जीवन को लेकर बहुत अधिक रहस्यात्मक हैं। वह देश की जनता से तमाम तरह की जानकारियां छुपाती आ रही हैं।

संघ ने आरोप लगाया कि तानाशाही और अलोकतांत्रिक मानसिकता की वजह से सोनिया जनता से अपना धर्म, बीमारी और इनकम टैक्स संबंधी जानकारी छुपाती रही हैं। आरएसएस का कहना है कि उन्होंने गैर-लोकतांत्रिक तरीके से राष्ट्रीय सलाहाकार परिषद (एनएसी) जैसे समानांतर सत्ता का केन्द्र बनाया है।

आरएसएस के हिन्दी और अंग्रेजी में छपने वाले मुखपत्रों 'पांचजन्य' व 'ऑर्गनाइजर' के ताजा अंकों में सोनिया पर ये आरोप लगाए गए हैं।
पांचजन्य के संपादकीय में कहा गया है कि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के जरिए सोनिया साम्प्रदायिक व लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक जैसे काले कानून का प्रारूप तैयार कराके विधायी प्रक्रिया में असंवैधानिक हस्तक्षेप करने जैसी हिमाकत कर रही हैं।

इसमें सवाल किया गया है कि क्या देश कांग्रेस की जागीर है जो उसके राजनीतिक हितों, सत्ता स्वार्थों व मंसूबों के हिसाब से चलाया जाएगा? उधर ऑर्गनाइज़र के लेख में आरोप लगाया गया है कि सोनिया अपने सार्वजनिक जीवन को लेकर बहुत अधिक रहस्यात्मक हैं।

इसमें कहा गया है, 'सोनिया गांधी ने पहले अपने धर्म को छिपाया, फिर संबंधियों को छिपाया और अब अपनी बीमारी को। वह लगातार इन सब जानकारियों को देश की जनता से छुपाती आ रही हैं।'

लेख में कहा गया है कि इस छिपाने और गोपनीयता बरतने की कांग्रेस अध्यक्ष की आदत का सबसे ताजा उदाहरण पिछले दस साल की अपनी इनकम टैक्स की जानकारी देने से इनकार करना है। ऑर्गनाइजर में दावा किया गया है कि सोनिया ने प्रिवेसी और सिक्युरिटी के नाम पर उनके द्वारा पिछले 10 सालों में दिए गए इनकम टैक्स की जानकारी देने से इनकार कर दिया।

इसमें कहा गया है कि इससे पहले उन्होंने अपने धर्म की जानकारी देने से यह कहकर इनकार कर दिया था कि यह उनका निजी मामला है जिसे वह सार्वजनिक नहीं करना चाहेंगी। ऑर्गनाइजर ने कहा है कि सभी सरकारी कागजातों और फॉर्मों में यह जानकारी देना जरूरी होने के बावजूद सोनिया इससे बचती आईं।

संघ ने दावा किया है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी शैक्षिक योग्यता को भी 'अति गोपनीय' बना कर छिपाया हुआ है। हाल ही में उनकी बीमारी और विदेश में इलाज के बारे में लेख में कहा गया है, 'सोनिया जब बीमार हुईं और सरकारी खर्चे पर इलाज के लिए विदेश गईं तो भी 'निजता का सम्मान' किए जाने के नाम पर उन्होंने बीमारी के बारे में देश को कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।

इसमें कहा गया है कि अगर उनके इलाज पर सरकारी पैसा खर्च हुआ है तो देश की जनता को यह जानने का हक है कि इसमें कितना सार्वजनिक धन लगा और क्यों लगा? जनता को यह जानने का भी अधिकार है कि जिस बीमारी का इलाज कराने वह विदेश गईं, क्या उसके इलाज की सुविधा देश में नहीं थी?

इस हालत के जिम्मेवार हैं वो बहुसंख्यक हिंदू....'Ban Gita' court battle restarts in Russia


गीता पर रोक लगाओ आबियान फिर शुरू 'Ban Gita' court battle restarts in Russia


'Ban Gita' court battle restarts in Russia


मुझे निम्नलिखित पत्र अमेरिका से अपने स्रोत से प्राप्त हुआ, इस निवेदन के साथ कि में इसकी सुचना अपने मित्रों में दे दूँ . 

सो में कर रहा हूँ .  पर मेरे मन में एक भाव बार बार उठता है , कि अपने देश  हिन्दुस्तान में कितने प्रतिशत हिंदुओं ने एक बार भी श्री गीता जी को पढ़ा है . 

कितने प्रतिशत यह कह सकते हैं कि बे श्री गीता को पढते हैं . 

कितने प्रतिशत कहते हैं कि वो इसे समझते हैं . 

कितने प्रतिशत घरों के हिंदू युवाओं ने इसे पढ़ा है . 

यही कारण है कि कोई भी हमारी श्री गीता जी , को , हमारे ग्रंथों को गाली दे कर चला जाता है . हिदू होना अपने आप में एक गाली है , क्योंकि हिंदू होने का मतलब , सांप्रदायिक होना है . हिदू की बात करना सांप्रदायिक है , 

यदि किसी मजहब के लोग खुल कर कहें कि हम फतवा प्राप्त मुस्लिम को हिन्दुस्तान में नहीं घुसने देंगे, तो यह कोई गाली का विषय नहीं , एक साधारण law and order problem hai , और उससे बचने का सबसे आसान तरीका है , उस  व्यक्ति को  देश में आने के अधिकार से वंचित कर दिया जाये . 

यदि कभी कुम्भ मेले के विषय में कोई आंतक वादी संगठन कह दे कि हम यहाँ पर बम विस्फोट कर देंगे, तो लोगों को बचाने का सबसे आसान तरीका है कि कुम्भ मेले को बंद कर दिया जाये. 

इस हालत के जिम्मेवार हैं वो बहुसंख्यक हिंदू, जो धर्म का ज्ञान न होने से , आंतंक वादियों के हातों नत मस्तक हैं . 

कमाल है,  कुछ आंतक वादी संगठन 110 करोड़ पर भारी हैं . 

अब हाज़िर है वो पत्र : ------------

ashok gupta ji
 
please propagate this article in among Hindus to counter fanatism propaganda.
 
 
क्या भगवत गीता हिंसा को बढ़ावा देने वाला धर्म ग्रन्थ हैं?
 
सदियों से संसार के सबसे ज्यादा शांतिप्रिय और सहनशील हिन्दू समाज जिसकी मुख्य शक्ति उसकी अध्यात्मिक विचारधारा हैं, जिसके कारण वह आज भी जीवित हैं और संपूर्ण संसार को प्रेरणा दे रही हैं पर निरंतर हमले होते रहे हैं. इसी श्रृंखला में एक ओर नाम रूस के तोम्स्क नामक नगर की अदालत से हिंदुयों के महान ग्रन्थ श्री मदभगवत गीता को उग्रवाद को बढावा देने वाला और कट्टरपंथी होने का फरमान हैं. १९९० के रूस के टुकड़े टुकड़े होने से देश में राजनैतिक उथल पुथल के साथ साथ अध्यात्मिक उथल पुथल भी हुई. एक समय साम्यवाद के नाम पर नास्तिकता को बढ़ावा देने वाले रूस में १९९० के बाद चर्च विशेषरूप से सक्रिय हो गया क्यूंकि उसे लगा की उसे खोई हुई ईसा मसीह की भेड़े दोबारा वापिस मिल जाएगी. इस्कान द्वारा विश्व भर में उनके गुरु प्रभुपाद द्वारा भाष्य करी गयी गीता का रूसी अनुवाद होने के बाद नास्तिक देश रूस में गीता का व्यापक प्रचार हुआ. मांस, वोदका (शराब) और स्वछंद विचारधारा को मानने वाले देश में शाकाहार, मदिरा से परहेज और ब्रहमचर्य का व्यापक प्रचार हुआ. इस प्रचार से हजारों की संख्या में रूसी लोगों ने गीता को अपने जीवन का अध्यात्मिक ग्रन्थ स्वीकार कर उसकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतरा. पहले से ही बदहाल और बंद होकर बिकने के कगार पर चल रहे ईसाई चर्च को चिंता हुई की अगर गीता का प्रभाव इसी प्रकार बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब पूरे रूस में मसीह का कोई भी नाम लेने वाला न रहेगा. इसलिए एक षडयन्त्र के तहत सुनियोजित तरीके से अदालत में केस दर्ज करवा कर गीता पर प्रतिबन्ध लगाने का प्रयास किया गया. गीता में श्री कृष्ण जी द्वारा अर्जुन को युद्ध भूमि में अपने ही सगे सम्बन्धियों के विरुद्ध युद्ध करने का आवाहन अर्जुन के मोह को दूर कर एक क्षत्रिय के धर्म का पालन कर पापियों अर्थात अधर्म का नाश करने का और धर्म की स्थापना करने का आवाहन किया गया हैं. इसे कोई मुर्ख ही उग्रवादी और कट्टरवादी कहेगा.सोचिये रूस का ही कोई नागरिक देश,जाति और धर्म के विरुद्ध कार्य करेगा तो रूसी संविधान के तहत उसे दंड दिया जायेगा या फिर नहीं दिया जायेगा और अगर कोई उस संविधान को हिंसक, मानवाधिकारों का हनन करने वाला,उग्रवादी और कट्टरवादी कहेगा तो आप उसे मुर्ख नहीं तो और क्या कहेगे. इसी प्रकार गीता में समाज में आचरण और व्यवहार करने का जो वर्णन हैं उसे कट्टरपंथी कहना निश्चित रूप से गलत हैं.
अब जरा गीता को कट्टरपंथी कहने वाले ईसाई समाज की धर्म पुस्तक बाइबल का अवलोकन करे की वह कितनी धर्म सहिष्णु और सेकुलर हैं.
Exodus – निर्गमन ३४.११-१४ में गैर ईसाईयों के साथ व्यवहार करने के बारे में देखिये क्या लिखा हैं
११. जो आज्ञा मैं आज तुम्हें देता हूं उसे तुम लोग मानना। देखो, मैं तुम्हारे आगे से एमोरी, कनानी, हित्ती, परिज्जी, हिब्बी, और यबूसी लोगोंको निकालता हूं।
१२. इसलिथे सावधान रहना कि जिस देश में तू जानेवाला है उसके निवासिक्कों वाचा न बान्धना; कहीं ऐसा न हो कि वह तेरे लिथे फंदा ठहरे।
१३. वरन उनकी वेदियोंको गिरा देना, उनकी लाठोंको तोड़ डालना, और उनकी अशेरा नाम मूतिर्योंको काट डालना;
१४. क्योंकि तुम्हें किसी दूसरे को ईश्वर करके दण्डवत्‌ करने की आज्ञा नहीं, क्योंकि यहोवा जिसका नाम जलनशील है, वह जल उठनेवाला ईश्वर है ही,
गीता में कहीं भी ईश्वर को जलने वाला नहीं लिखा हैं अर्थात द्वेष करने वाले नहीं लिखा हैं.फिर गीता कट्टरवादी धर्म ग्रन्थ कैसे हो सकती हैं.
Leviticus -लैव्यव्यवस्था २६.७-९ में लिखा हैं की जो शत्रु को मरते हैं बाइबल में वर्णित ईश्वर उन पर कृपा दृष्टि रखते हैं.
२६.७ और तुम अपके शत्रुओं को मार भगा दोगे, और वे तुम्हारी तलवार से मारे जाएंगे।
२६.८ और तुम में से पांच मनुष्य सौ को और सौ मनुष्य दस हजार को खदेड़ेंगे; और तुम्हारे शत्रु तलवार से तुम्हारे आगे आगे मारे जाएंगे;
२६.९ और मैं तुम्हारी ओर कृपा दृष्टि रखूंगा और तुम को फलवन्त करूंगा और बढ़ाऊंगा, और तुम्हारे संग अपक्की वाचा को पूर्ण करूंगा।
जब शत्रु को मारने की आज्ञा गीता में भी हैं और बाइबल में भी हैं तो गीता को उग्रवादी धर्म ग्रन्थ कहना अज्ञानता भी हैं और दुष्टता भी हैं.
Deuteronomy – व्यवस्थाविवरण २.३३ में बाइबल वर्णित परमेश्वर द्वारा शत्रु के पुत्रों को सेना समेत मार डालने का वर्णन हैं.
२.३३ और हमारे परमेश्वर यहोवा ने उसको हमारे द्वारा हरा दिया, और हम ने उसको पुत्रोंऔर सारी सेना समेत मार डाला।
क्या इसे आप बाइबल में हिंसा नहीं कहेंगे?
Genesis – -उत्पत्ति ११.५-७ में बाइबल वर्णित ईश्वर को भाषा की गड़बड़ी करने वाला बताया गया हैं.
११.५ जब लोग नगर और गुम्मट बनाने लगे; तब इन्हें देखने के लिथे यहोवा उतर आया।
११.६ और यहोवा ने कहा, मैं क्या देखता हूं, कि सब एक ही दल के हैं और भाषा भी उन सब की एक ही है, और उन्होंने ऐसा ही काम भी आरम्भ किया; और अब जितना वे करने का यत्न करेंगे, उस में से कुछ उनके लिथे अनहोना न होगा।
११.७ इसलिये आओ, हम उतर के उनकी भाषा में बड़ी गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें।
ईश्वर पर ऐसा दोष लगाने वाली पुस्तक बाइबल को क्या आप धर्म पुस्तक कहना पसंद करेगे?
Numbers – गिनती १२.९,१० में बाइबल के ईश्वर को रोग उत्पन्न करने वाला बताया गया हैं.
१२.९ तब यहोवा का कोप उन पर भड़का, और वह चला गया;
१२.१० तब वह बादल तम्बू के ऊपर से उठ गया, और मरियम कोढ़ से हिम के समान श्वेत हो गई। और हारून ने मरियम की ओर दृष्टि की, और देखा, कि वह कोढ़िन हो गई है।
कोई मुर्ख ही इस बात पर विश्वास करेगा को संसार में रोगों की उत्पत्ति का कारण ईश्वर हैं.
इस प्रकार की अनेक दोषपूर्ण, मुर्खतापूर्ण,अविवेकी,कट्टरवादी और उग्रवादी विचार धारा को मानने वाले इसाई मत की धर्म पुस्तक बाइबल को कोर्ट द्वारा धार्मिक सद्भावना और भाई चारे के वातावरण को नष्ट करने वाली कहना श्रेयकर होगा.संसार के बुद्धिजीवी वर्ग को एकजूट होकर इस प्रकार की सभी धर्म पुस्तकों पर पाबन्दी लगा देनी चाहिए न की गीता पर पाबन्दी लगनी चाहिए.और साथ ही साथ हिंदुयों के शत्रु यह भी याद रखे की
‘एक कहावत हैं जिनके घर शीशे के होते हैं वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते’
बाइबल के विषय में अधिक जानकारी के लिए Michael d, Souza से अरुण आर्यवीर बने आर्यजन द्वारा अपने जीवन पर लिखित पुस्तक इस पते पर पढ़ सकते हैं.

झूम के मनाओ : हैप्पी वेलेंटाईन डे , यानि हैप्पी मदनोत्सव , यानि हैप्पी होली ,


  

बसंत आ गया , 


पर अफ़सोस , इतने सालों से हम एक देसी त्यौहार होली में ही उलझे पड़े हैं .


अब तो हमारे पास आपनी सरकार है , पैसा है , बंगला है,  कार है , फिर भी वाही कीचड वाला होली का त्यौहार ही क्यों . 


अब हर चीज़ का इम्पोर्ट अलाउड है , तो त्योहारों का क्यों नहीं , 


कब तक हम दकियानूसी त्योहारों में भंग पिटे रहेंगे , 


इसलिए आइये मनाएं वलेंताईन डे . 


इस पर जब पता करने चला तो , शुरुआत गूगल से हुई , पता चला कि इसका हिस्टरी में भी कोई सिर पैर नहीं , पर मजा खूब है , तो सिर पैर का क्या करना . 


और यदि आपको contrl C contrl V कि टेक्नोलोजी आती है तो बड़ा लेखक बनाने में क्या देर है ; 


चोरी का ही सही पर , आपके लिए माल ढूढ  कर  हाज़िर है : 


चोरी का लिंक : http://hindini.com/fursatiya/archives/584


पर तकलीफ क्यों करते हैं : लेख यहीं पर हाज़िर है : - 
वनन में बागन में बगर्‌यो बसंत है…
वैलेंटाइन दिवस
बसंत पंचमी निकल गयी। वैलेंटाइन दिवस भी बस आना ही चाहता है। हमें लगा इस मौके परकुछ न लिखा न तो क्या लिखा। लिहाजा लिखने बैठे मेरा मतलब बिस्तर पर लेटे तो अपना पुराना माल दिख गया। सोचा पहिले इसे आपको दिखा दें फ़िर कुछ आगे लिखा जाये।
यह लेख अभिव्यक्ति में ठीक दो साल पहिले प्रकाशित हो चुका है। हमने अपने ब्लाग पर पोस्ट किया कि नहीं यह देखने के लिये जब हमने सर्च करी तो पता चला कि यह हमारे ब्लाग पर तो नहीं लेकिन बनारसी भाई गौरव शुक्ला के यहां जस का तस विराजमान है। क्या इसी को कहते हैं – अंधे पीसें कुत्ते खायें? लेख हमारा है लेकिन छपा वो गौरव के ब्लाग पर पहिले है तो क्या मेरा यहां छापना यह चोरी कहलायेगा? कोई हमें बतायेगा? :)
ऐसे प्रशंसक भी कहां मिलते हैं भाई! जो आपकी रचनायें पढ़ें पसंद करें और उसको अपना समझें! :)

मिलना नारद का श्री श्री विष्णु महाराज से

पुराना ट्रक
विष्णु जी बिस्तर पर करवटें बदलते-बदलते थक गए थे। उनके उलटने-पुलटने से शेषनाग भी उसी तरह फुफकार रहे थे जिस तरह चढ़ाई पर चढ़ते समय कोई पुराना ट्रक ढेर सारा धुआँ छोड़ता है। अचानक सामने से नारद जी चहकते हुए आते दिखे। नारद जी को देखकर विष्णु जी बोले, ”क्या बात है नारद! तुम्हारा चेहरा तो किसी टीवी चैनेल के एंकर की तरह चमक रहा है।
नारद जी बोले, ”प्रभो आप भी न! मसख़री करना तो कोई आपसे सीखे। कितने युग बीत गए कृष्णावतार को लेकिन आपका मन उन्हीं बालसुलभ लीलाओं में रमता है।”
नारद जी के मुँह से ‘आप भी न!’ सुनकर विष्णु जी को अपनी तमाम गोपियाँ, सहेलियाँ याद आ गईं जो उनकी शरारतों पर पुलकते हुए उन्हें ‘आप भी न’ का उलाहना देती थीं।
नारद जी के मुँह से ‘आप भी न!’ सुनकर विष्णु जी को अपनी तमाम गोपियाँ, सहेलियाँ याद आ गईं जो उनकी शरारतों पर पुलकते हुए उन्हें ‘आप भी न’ का उलाहना देती थीं।
”हाँ, नारद सच कहते हो। आख़िर रमें भी क्यों न। मेरा सबसे शानदार कार्यकाल तो कृष्णावतार का ही रहा। उस दौर में कितना आनंद किया मैंने। मेरे भाषणों की एकमात्र किताब -गीता भी, उसी दौर में छपी। मेरा मन आज भी उन्हीं स्मृतियों में रमता है। बालपन की शरारतों को याद करके मन उसी तरह भारी हो जाता है जिस तरह किसी भी प्रवासी का मन होली-दीवाली भारी होने का रिवाज़ है। विष्णुजी पीतांबर से सूखी आँखें पोछने लगे।
यह ‘अँखपोछवा’ नाटक देखना न पड़े इसलिए नारद जी नज़रें नीची करके क्षीरसागर में, बड़ी मछली छोटी मछली को खाती है, का सजीव प्रसारण देखने लगे।
विष्णु जी ने अपना नाटक पूरा करने के बाद जम्हुआई लेते हुए नारद जी से कहा, ”और नारद जी कुछ नया ताज़ा सुनाया जाय। न हो तो मृत्युलोक का ही कथावाचन करिए। क्या हाल हैं वहाँ पर जनता-जनार्दन का?”

स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा

बसंत
नारद जी गला खखारकर बिना भूमिका के शुरू हो गए-
”महाराज पृथ्वीलोक में इन दिनों फरवरी का महीना चल रहा है। आधा बीत गया है। आधा बचा है। वह भी बीत ही जाएगा। जब आधा बीत गया तो बाकी आधे को कैसे रोका जा सकता है! हर तरफ़ बसंत की बयार बह रही है। लोग मदनोत्सव की तैयारी में जुटे हैं। कविगण अपनी यादों के तलछट से खोज-खोजकर बसंत की पुरानी कविताएँ सुना रहे हैं। कविताओं की खुशबू से कविगण भावविभोर हो रहे हैं। कविताओं की खुशबू हवा में मिलकर के नथुनों में घुसकर उन्हें आनंदित कर रही है। वहीं कुछ ऊँचे दर्जे की खुशबू कतिपय श्रोताओं के ऊपर से गुज़र रही हैं। ये देखिए ये कविराज ने ये कविता का ‘ढउआ’ (बड़ी पतंग) उड़ाया तथा शुरू हो गए-
”स्वागत है ऋतुराज तुम्हारा, स्वागत है ऋतुराज।
हर तरफ़ बसंत की बयार बह रही है। लोग मदनोत्सव की तैयारी में जुटे हैं। कविगण अपनी यादों के तलछट से खोज-खोजकर बसंत की पुरानी कविताएँ सुना रहे हैं। कविताओं की खुशबू से कविगण भावविभोर हो रहे हैं। कविताओं की खुशबू हवा में मिलकर के नथुनों में घुसकर उन्हें आनंदित कर रही है।
ऋतुराज के मंझे में वे आगे साज/ बाज /आज/ काज /खाज /जहाज़ की सद्धी (धागा) जोड़ते हुए ढील देते जा रहे हैं। उधर से दूसरी कविता की पतंग उड़ी है जिनमें बनन में बागन में बगर्‌यो बसंत है के पुछल्ले के साथ दिगंत/संत/महंत/अनंत/कहंत/हंत/दंत घराने का धागा जुड़ा है। पतंग-ढउवे का जोड़ा क्षितिज में चोंच लड़ा रहा है। दोनों की लटाई से धागे की ढील लगातार मिल रही थी तथा वे हीरो-हीरोइन की तरह एक दूसरे के चक्कर काट रहे हैं। दोनों एक दूसरे से चिपट-लिपट रहे हैं। गुत्थमगुत्था हो रहे हैं। तथा सरसराते हुए फुसफुसा रहे हैं- हम बने तुम इक दूजे के लिए।
और प्रभो, मैं यह क्या देख रहा हूँ। दोनों के सामने एक पेड़ की डाल आ गई है। वे पेड़ की डाल में फँस के रहे गए हैं। पेड़ की डाल कुछ उसी तरह से है जिस तरह जाट इलाके का बाप अपने बच्चों को प्रेम करते हुए पकड़ लेने पर फड़फड़ाता है तथा उनको घसीट के पंचायत के पास ले जाता है ताकि पंचायत से न्याय कराया जा सके।”
विष्णु जी बोले, ”यार नारद ये क्या तुम क्रिकेट की कमेंट्रीनुमा बसंत की कमेंट्री सुना रहे हो? ये तो हर साल का किस्सा है। कुछ नया ताज़ा हो तो सुनाओ। ‘समथिंग डिफरेंट’ टाइप का।”

‘वैलेंटाइन डे’ के किस्से

'वैलेंटाइन डे'
नारद जी ने घाट-घाट का पानी पिया था। वे समझ गए कि विष्णुजी ‘वैलेंटाइन डे’ के किस्से सुनना चाह रहे थे। लेकिन वे सारा काम थ्रू प्रापर चैनेल करना चाहते थे। लिहाज़ा वे विष्णुजी को खुले खेत में ले गए जिसे वे प्रकृति की गोद भी कहा करते थे।
सरसों के खेत में तितलियाँ देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तरह मंडरा रहीं थीं। हर पौधा तितलियों को देखकर थरथरा रहा था। भौंरे भी तितलियों के पीछे शोहदों की तरह मंडरा रहे थे। आनंदातिरेक से लहराते अलसी के फूलों को बासंती हवा दुलरा रही थे। एक कोने में खिली गुलाब की कली सबकी नज़र बचाकर पास के गबरू गेंदे के फूल पर पसर-सी गई। अपना काँटा गेंदे के फूल को चुभाकर नखरियाते तथा लजाते हुए बोली, ”हटो, क्या करते हो? कोई देख लेगा।”
सरसों के खेत में तितलियाँ देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तरह मंडरा रहीं थीं। हर पौधा तितलियों को देखकर थरथरा रहा था। भौंरे भी तितलियों के पीछे शोहदों की तरह मंडरा रहे थे। आनंदातिरेक से लहराते अलसी के फूलों को बासंती हवा दुलरा रही थे। एक कोने में खिली गुलाब की कली सबकी नज़र बचाकर पास के गबरू गेंदे के फूल पर पसर-सी गई। अपना काँटा गेंदे के फूल को चुभाकर नखरियाते तथा लजाते हुए बोली, ”हटो, क्या करते हो? कोई देख लेगा।”
गेंदे ने कली की लालिमा चुराकर कहा, ”काश! तुम हमेशा मुझसे ऐसे ही कहती रहती- छोड़ो जी कोई देख लेगा।”
कली उदास हो गई। बोली, ”ऐसा हो नहीं सकता। हमारा तुम्हारा कुल, गोत्र, प्रजाति अलग है। हम लोग एक दूजे के नहीं हो सकते। हम तुम दो समांतर रेखाओं की तरह हैं जो साथ-साथ चलने के बावजूद कभी नहीं मिलती।
पास के खेत में खड़े जौं के पौधे की मूँछें (बालियाँ) गेंदे – गुलाब का प्रेमालाप सुनते हुए थरथरा रहीं थीं। खेत में फसल की रक्षा के लिए खड़े बिजूके के ऊपर का कौवा भी बिना मतलब भावुक होकर काँवकाँव करने लगा।”
नारद जी इस प्रेमकथा को आगे खींचते लेकिन विष्णुजी को जम्हाई लेते देख गीयर बदल लिया तथा वैलेंटाइन डे के किस्से सुनाने लगे।
”महाराज आज पूरे देश में ‘वैलेंटाइन डे’ की छटा बिखरी है। जिधर देखो उधर वैलेंटाइन के अलावा कुछ नहीं दिखता। सब तरफ़ इलू-इलू की लू चल रही है तथा वातावरण में भयानक गर्मी व्याप्त है। भरी फरवरी में जून का माहौल हो रहा है। लोग अपने कपड़े उतारने उसी तरह व्याकुल हैं जिस तरह अमेरिका तमाम दुनिया में लोकतंत्र की स्थापना को व्याकुल रहता है।
सारे लोग अपने-अपने प्यार का स्टॉक क्लीयर कर रहे हैं। जो सामने दिखा उसी पर प्यार उड़ेले दे रहे हैं। गलियों में, बहारों में, छतों में, दीवारों में, सड़कों में, गलियारों में, चौबारों में प्यार ही प्यार अंटा पड़ा है। हर तरफ़ प्यार की बाढ़-सी आ रखी है। टेलीविज़न, इंटरनेट, अख़बार, समाचार सब जगह प्यार ही प्यार उफना रहा है। तमाम लोगों के प्यार की कहानियाँ छितरा रहीं हैं। टेलीविज़न का कोई चैनेल शिव सैनिक के प्यार का अंदाज़ बता रहा है तो इंटरनेट की कोई साइट लालू यादव-राबड़ी देवी की प्रेमकथा बता रहा है। पूरा देश सब कुछ छोड़कर कमर कसकर ‘वैलेंटाइन डे’ मनाने में जुट गया है। वैलेंटाइन के शंखनाद से डरकर अभाव, दैन्य, ग़रीबी तथा तमाम दूसरे दुश्मन सर पर रखकर नौ दो ग्यारह हो गए हैं।”

कार्य प्रगति पर है

'वैलेंटाइन डे'
विष्णु जी बोले, ”लेकिन यह ‘वैलेंटाइन डे’ हमने तो कभी नहीं मनाया। नारद जी के पास जवाब तैयार था, ”महाराज, आपके समय की बात अलग थी। समय इफ़रात था आपके पास। जब मन आया प्रेम प्रदर्शन शुरू कर दिया। लताएँ थीं, कुंज थीं, संकरी गलियाँ थीं। जहाँ मन आया, ‘कार्य प्रगति पर है’ का बोर्ड लगाकर रासलीला शुरू कर दी। जितना कर सके किया बाकी अगले दिन के लिए छोड़ दिया। कोई हिसाब नहीं माँगता था। साल भर प्यार की नदी में पानी बहता था। लेकिन आज ऐसा नहीं हो सकता। प्यार की नदियाँ सूख गईं हैं। अब सप्लाई टैंकों से होती है। साल भर इकट्ठा किया प्यार। ‘वैलेंटाइन डे’ वाले दिन सारा उड़ेल दिया। छुट्टी साल भर की। एक दिन में जितना प्यार बहाना हो बहा लो। ये थोड़ी की सारा साल प्यार करते रहो। दूसरे ‘डे’ को भी मौका देना है। फादर्स डे, मदर्स डे, प्रपोज़ल डे, चाकलेट डे, स्लैप डे (तमाचा दिवस) आदि-इत्यादि। जिस रफ़तार से ‘डेज़’ की संख्या कुकुरमुत्तों की तरह बढ़ रही है उससे कुछ समय बाद साल में दिन कम होंगे, ‘डे’ ज़्यादा। मुंबई की खोली की तरह एक-एक दिन में पाँच-पाँच सात-सात ‘डेज़’ अँटे पड़े होंगे।”
विष्णु जी बंबई का ज़िक्र सुनते ही यह सोच कर घबरा गए कि कोई उनका संबंध दाउद की पार्टी से न जोड़ दे। वे बोले, ”कैसे मनाते हैं ‘वैलेंटाइन दिवस’?”
शाम को सारा देश थिरकने लगता है। नाचने में अपने शरीर के सारे अंगों को एक-दूसरे से दूर फेंकना होता है। स्प्रिंग एक्शन से फेंके गए अंग फिर वापस लौट आते हैं। दाँत में अगर अच्छी क्वालिटी का मंजन किया हो तो दाँत दिखाए जाते हैं या फिर मुस्कराया जाता है। दोनों में से एक का करना ज़रूरी है। केवल हाँफते समय, सर उठाकर कोकाकोला पीते समय या पसीना पोंछते समय छूट मिल सकती है।”
नारद जी बोले, ”मैंने तो कभी मनाया नहीं भगवन! लेकिन जितना जानता हूँ बताता हूँ। लोग सबेरे-सबेरे उठकर मुँह धोए बिना जान-पहचान के सब लोगों को ‘हैप्पी वैलेंटाइन डे’ बोलते हैं। हैप्पी तथा सेम टू यू की मारामारी मची रहती है। दोपहर होते-होते तुमने मुझे इतनी देर से क्यों किया। जाओ बात नहीं करती की शिकवा शिकायत शुरू हो जाती है। शाम को सारा देश थिरकने लगता है। नाचने में अपने शरीर के सारे अंगों को एक-दूसरे से दूर फेंकना होता है। स्प्रिंग एक्शन से फेंके गए अंग फिर वापस लौट आते हैं। दाँत में अगर अच्छी क्वालिटी का मंजन किया हो तो दाँत दिखाए जाते हैं या फिर मुस्कराया जाता है। दोनों में से एक का करना ज़रूरी है। केवल हाँफते समय, सर उठाकर कोकाकोला पीते समय या पसीना पोंछते समय छूट मिल सकती है।
तमाम टेलीविज़न तरह-तरह के सर्वे करते हैं। जैसे इस बार सर्वे हो रहा है। देश का सबसे सेक्सी हीरो कौन है-शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान या अभिषेक बच्चन। हीरो अकेले नहीं न रह सकता लिहाज़ा यह भी बताना पड़ेगा- सबसे सेक्सी हीरोइन कौन है- रानी मुखर्जी, ऐश्वर्या राय, प्रीति जिंटा या सानिया मिर्ज़ा। देश का सारा सेक्स इन आठ लोगों में आकर सिमट गया है। अब आपको एस.एम.एस. करके बताना है कि इनमें सबसे सेक्सी कौन है। आपको पूरी छूट है कि आप जिसे चाहें चुने लेकिन इन आठ के अलावा कोई और विकल्प चुनने की आज़ादी नहीं है आपके पास। करोड़ों के एस.एम.एस. अरबों के विज्ञापन बस आपको बताना है कि सबसे सेक्सी जोड़ा कौन है?
चुनना चार में ही है। ऐसी आज़ादी और कहाँ? जो जोड़ा चुना जाएगा उसका हचक के प्रचार होगा। प्रचार के बाद दुनिया के सबसे जवान देश के नौजवान लोग देश के इस सबसे सेक्सी जोड़े को अपने सपनों में ओपेन सोर्स प्रोग्राम की तरह मुफ़्त में डाउनलोड करके अपना काम चलाएँगे।
कंप्यूटर की भाषा से विष्णु जी को उसी तरह अबूझ लगती है जिस तरह क्रिकेटरों, हिंदी सिनेमा वालों को हिंदी। वे झटके से बोले, ”अच्छा तो नारद अब तुम चलो। मैं भी चलता हूँ, लक्ष्मी को हैप्पी ‘वैलेंटाइन डे’ बोलना है।”
नारद जी टेलीविज़न पर टकटकी लगाए हुए सर्वे में भाग लेने के लिए अपने मोबाइल पर अंगुलियाँ फिराने लगे। वोटिंग लाइन खुली थीं। आप भी काहे को पीछे रहें?

जो भारत माता का रेप कर रहे हैं, उन से बुरा काम तो इन बेचारों ने नहीं किया .


       

जो भारत माता का रेप कर रहे हैं, उन से बुरा काम तो इन बेचारों ने नहीं किया .


ये बेचारे तो इन्द्रियों के गुलाम हैं , और अपने कृत्य पर शर्म भी आयी , 


पर इन सरकारी दामादों  का तो शर्म से भी वास्ता नहीं है 


कहते हैं , हम तो बड़े भोले हैं , जो पहली सरकार कह गयी , हम तो उसका हुक्म ही बजा रहे थे, 


हिन्दुओ जागो , मुसलमानों से उतना खतरा नहीं है , जितना इन भारत माता के बलात्कारीओं से है .


 
देखो इनके चेहरे ! है शर्म का कोई निशाँ 
the big rapist of the country:
chidambaram, raja, sibbal, and whole gandhi government including man mohan singh.

चिदंबरम बरी : किसी ने भी घोटाला नहीं किया , सब दूध के धुले है . सिब्बल : कोई घोटाला हुआ ही नहीं : no one killed jessica


bharat ratna for dr swamy


      
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डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी भारत रत्न के हकदार हैं

    समय समय पर कॉंग्रेस सरकार के अकेले ही दांत खट्टे कर देने वाले , जनता पार्टी के अध्यक्ष और सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी भारत रत्न के मजबूत दावेदार बनते हैं | 15 सितम्बर 1939 को चेन्नई में जन्मे डॉ. स्वामी पेशे से प्रोफ़ेसर , राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री के साथ जनता पार्टी के अकेले महारथी हैं | श्री सीताराम सुब्रमण्यम , जो भारत सरकार के सचिव पद से रिटायर हुए , इनके पिता थे ! माता तमिल भाषी लेकिन केरल से थी | दिल्ली के हिन्दू कॉलेज से गणित में हौनार्स की डिग्री प्राप्त करने के बाद इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ statistics से मास्टर डिग्री ली और फिर उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए स्कोलरशिप लेकर हावर्ड विश्वविद्यालय गए जहाँ इन्हें सन 1965 में अर्थशास्त्र में पी . एच . डी. की डिग्री से नवाज़ा गया | डॉ.स्वामी हावर्ड विश्वविधालय में ही प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए और अब भी वहां समर क्लास्सेस लेते हैं | डॉ. स्वामी आई .आई .टी . दिल्ली में 1969 से लेकर 1991 तक अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर भी रहे हैं | डॉ.स्वामी 1974 से लेकर 1999 तक पांच बार लोकसभा के सदस्य रहे हैं | डॉ. स्वामी 1990 से 1991 और 1994 से लेकर 1996 तक योजना आयोग के भी सदस्य रहे हैं | सन 2004 में डॉ. स्वामी ने कॉंग्रेस नीत सरकार के विरोधस्वरूप राष्ट्रीय स्वाभिमान मंच बनाया जो उन्हीं की जनता पार्टी का एक हिस्सा है | केंद्रीय मंत्री रहे डॉ. स्वामी अंतर्राष्ट्रीय मामलों और आर्थिक मामलों के भी विशेषज्ञ माने जाते हैं | उन्हीं के प्रयासों से भारत और चीन के बीच समझौता हुआ और कैलाश मानसरोवर जाने के लिए रस्ता मिला | डॉ. स्वामी ही 1981 में सबसे पहले कैलाश मानसरोवर पहुँचने वाले भारत वासी बने | डॉ. स्वामी ने हमेशा इस्राएल की प्रशंशा की है कि कैसे उसने अपने आपको अरब के लोगों से न केवल महफूज़ रखा है बल्कि एकमात्र गैर मुस्लिम राष्ट्र होते हुए भी अपना प्रभुत्व बनाये रखा है | डॉ. स्वामी हमेशा इस्राएल से अच्छे संबंधों के हिमायती रहे हैं |
    कॉंग्रेस सरकार की चूलें हिला देने वाले 2G स्पेक्ट्रम घोटाले को उजागर करने वाले डॉ. स्वामी को भारत रत्न देने की हिमायत भी कई बार हुई है लेकिन कॉंग्रेस अपने पक्के दुश्मन को भारत रत्न पुरस्कार से कैसे सम्मानित कर सकती है ? जब कॉंग्रेस की सरकार एक भ्रष्ट प्रधानमंत्री को भारत रत्न दे सकती है तो मुझे लगता है की इमानदार व्यक्ति को इसके लिए नोमिनेट करना भी भारी होगा | स्पष्ट रूप से लिखना चाहता हूँ कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को भारत रत्न देने में सरदार वल्लभ भाई पटेल से ज्यादा वरीयता दी जाती है , क्यूँ ? जबकि सबको पता है कि राजीव गाँधी बोफोर्स घोटाले में शामिल थे , मगर उन्हें भारत रत्न देकर इस सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार की तौहीन करी गई !

    देश की आजादी से बरबादी के सफर में हमने आधी से अधिक सदी गुजारी है |
    दोस्तो राजनीति के पहिये पर सवार ये सफर आज भी अनवरत जारी है ||

    अगर डॉ. स्वामी 2G के केस में रूचि न लेते तो कॉंग्रेस का ये महा घोटाला जनता के सामने कभी आ ही नहीं पाता | आप जिन्हें सीधा और ईमानदार प्रधानमंत्री कहते हैं , उन्हीं डॉ. मनमोहन सिंह ने डॉ. स्वामी के सन 2008 में भेजे गए पत्रों पर कोई एक्शन नहीं लिया गया | इन पत्रों में स्पष्ट रूप से बताया गया था की ए.राजा अपनी मन मर्ज़ी कर रहे हैं लेकिन इस सब के बावजूद आपके ईमानदार प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने न जाने किस मजबूरी के चलते ( वही जानें ) इस केस को दबाये रखा और इस मजबूरी ने भारत देश की इज्जत को दांव पर लगा दिया | कहीं ये मज़बूरी सोनिया गाँधी की तरफ से तो नहीं ? क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस घोटाले की राशि में से 18 ,000 करोड़ रुपये सोनिया गाँधी की दोनों बहनों अनुष्का और नादिया को भी दिया गया और कुछ हिस्सा सोनिया गाँधी के दामाद को भी दिया गया | बन्दर बाँट करी गई हमारे खून पसीने की कमाई की | क्या डॉ. मनमोहन सिंह को कोई एक्शन नहीं लेना चाहिए था ? आखिर डॉ. स्वामी को यह केस सुप्रीम कोर्ट में ले जाना पड़ा और बाकी की कहानी आपको पता ही है | लेकिन आपको एक बात जरुर बताना चाहूँगा कि इस से बुरी गत कॉंग्रेस की और क्या होगी कि जब सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा स्पेक्ट्रम की नीलामी का आदेश दिया तो उसमें स्पष्ट रूप से कहा कि संचार मंत्री कपिल सिब्बल को इस सबसे दूर रखा जाये | वाह !

    राज की क्या बात करें अराजकता फैली भरपूर है |
    शासक उन्मुक्त और आजाद है, लेकिन जनता मजबूर है ||


    Dr Subramanian Swamy is a Genuine Indian Hero

    30 NOVEMBER 2010 55 COMMENTS
    There’s no doubt in my mind that what India needs is a dozen Dr Subramanian Swamys. One Dr Swamy is definitely not enough. Why? Because the garbage which needs taking out cannot be done by one person, however brilliant, hardworking and committed. But for now, let us thank our lucky stars that India has Dr Swamy at least. He has the nature of a warrior, a karma yogi. But he is also a gyan yogi. With that said for the record, I would like to share with you a few videos of his you must watch.
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    Manoj Desai (Texas, USA) 
    08 Jan, 2012 06:03 AM
    Bharat Ratna for Dr. Subramanian Swamy.=========================