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सांसद .....संसद....और. अवमानना.... डा श्याम गुप्त


                           यदि हम कहें कि हमारे देश में बहुत अधिक भ्रष्टाचार है, अपराध हैं, गरीबी है, महिलाओं के प्रति अत्याचार होरहे हैं, हमारे देशवासी गरीब है , तमाम लोग  टेक्स की चोरी व अपराधों में लिप्त ...तो क्या इसका अर्थ है कि यह देश का अपमान है.....क्या यह देश की अवमानना या  देश-द्रोह है । सभी समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं, कविताओं, साहित्य में यह कहा जाता है, कहा जारहा है ...परन्तु किसी ने इसे देश की अवमानना नहीं कहा ।
                           तो क्या हमारे सांसद जो जनता व देश के सेवक हैं , हम ही इन्हें चुनकर भेजते हैं ....क्या देश से भी ऊपर हैं जो इनमें उपस्थित भ्रष्ट लोगों को भ्रष्ट नहीं कहा जा सकता है । भ्रष्ट सांसदों को भ्रष्ट कहना जो कि समाचार पत्रों व थानों तक में नामित हैं ।
                         सांसद .....संसद के सदस्य हैं ...स्वयं संसद नहीं  अतः उनके आचरण पर उन्हें ही संसद भेजने वाली जनता का कोई व्यक्ति उंगली उठाये तो उसे संसद  की अवमानना क्यों व कैसे  माना जा सकता है  ???   यह सोचना व इस पर अमल करना ही लोकतंत्र की...जन तंत्र की ...व राष्ट्र की अवमानना है ।



नेहरु जी योवन रोग से पीड़ित मरे, देश याद करता है , तीन शहीद कल मरे, मुझको भी पता नहीं


क्या आपको, सरकार को, मुझको , किसी को भी एहसास था कि कल तीन शहीदों का शहीद दिवस था . who cares, and why care


HJS salutes Bhagat Singh, Sukhdev & Rajguru on their Martyrdom Day (23 March) !

From Left : Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru
From Left : Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru

‘When power is misused, it translates into violence; but when it is used for achieving one's Righteous goals, it amounts to justice.’ This revolutionary ideology was stated by the great revolutionary Bhagat Singh. ‘Any sacrifice will be inadequate to accomplish the greatest aim of freeing the motherland’, was the inspiring outlook of Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru, his associates in the freedom fight. Today is the day when these three great revolutionaries laid down their lives in their effort to achieve their goal !

O People ! Do not be so ungrateful to Revolutionaries so as to forget them !

Read more about Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev :http://www.hindujagruti.org/news/4306.html

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सम्मवत् 2069 शुक्रवार तदानुशार 23 मार्च 2012 आपके लिए मंगलमय हो…


हम भारतीय नव वर्ष का प्रारम्भ हिन्दू, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से मानते  हैं क्योंकि ?
• इस तिथि से ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारम्भ किया।
• मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र जी का इस दिन राज्याभिषेक हुआ।
• इस दिन नवरात्रों का महान पर्व आरम्भ होता है।
• देव भगवान झूले लाल जी का जन्म दिवस ।
• महाराजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत का शुभारम्भ ।
• राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्म दिवस।
• महर्षि दयानन्द जी द्वारा आर्य समाज का स्थापना दिवस।
• संसार के अधिकतर देशों के बजट की इन्हीं दिनों(पखवाड़े में) शुरूआत होती
इसके अतिरिक्त ये वो वक्त है जब आप के शरीर में नए खून का ज्वार उठता है व आपके आसपास की प्रकृति भी नए कपड़े डालकर नव वर्ष शुरू होने का संकेत दुनिया के समझदार लोगों तक पहुंचाती है…

दूसरी तरफ बहुत से वेसमझ लोग ग्रेगेर्रियन कलैंडर के अनुशार 1 जनवरी को,  एक वयक्ति इसामशीह  के मरनोउपरांत खुशियां मनाकर उसे नव वर्ष का नाम देकर दुनिया को भ्रमित करने की पुरजोर कोशिस करते हुए मानबता का मखौल उड़ाते हैं अब ये आपके अपनी मर्जी है कि
आप अपनी आने वाली पिढ़ीयों को कैसा बनाना चाहते हैं
ऐसा

(अंग्रेजी नव वर्ष पहली जनवरी मनाने वाला)
या फिर ऐसा

(भारतीय नव वर्ष वर्षप्रतिपदा मनाने वाला)
ऐ वतन तेरी कसम ,कुर्बान हो जांएगे हम ।
                                           तेरी खातिर मौत से भी , जा टकरांएगे हम ।
संसकार एक दिन में न बनता है न बिगड़ता है यह एक सतत प्रक्रिया है आप कौन सी प्रक्रिया अपनाकर अपने बच्चों के हवाले करते हैं वही उनका संसकार निर्माण करेगा।
जागो हिन्दू जागो पहचाने अपने अन्दर वह रहे भारतीय खून को और इस खून से जुड़ी महान सच्चाईयों को… जिनमें से नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारम्भ होता है…. भी एक है
आप सबको हिन्दू नबवर्ष के शुभ अवसर पर एक वार फिर हार्दिक शुभकामनायें

जल दिवस----डा श्याम गुप्त....

जल दिवस बस यूंही मनाते जायंगे ।
जल को पानी की तरह बहाते जायंगे।
जल रहे न रहे पीने को इंसान को -           
जलजले तो यहाँ आते ही जायंगे ।।
 

heartly greetings on भारतीय नववर्ष ,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 2069 (indian new year) (23 march2012) , and happy navratra and राम-नोमी (1 april), and sign the petition pl

         

नव- वर्ष की हार्दिक बधाई : Happy new indian year 
(23 march, 1st day of 1st month, chaitra चैत्र )
हम भारतवासियों के लिए नववर्ष का यह दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को पड़ता है। 
  
Ram Navami in 2012 is on Sunday, the 1st of April.


        

हिंदू कलेन्डर 

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here there is a letter by one my friend and world famous indologist,  in belgium, who is a christian by birth but  having faith in hindu spirituality, mr stephen knapp.
please help, for the cause of saving the hinduism against the indian govt.actions against  the fundamental right of individual religion for hindus. your every click matters for humanity in this world , and in the kingdom of god. just sign the petition , if you please(my personal humble request) : 

Namaste,
    I've just heard about this, but this seems to be another avenue by which the government of India, in this case the state government, is making it increasingly difficult to be a Hindu or follow the Vedic traditions. As I have said for years, we have more freedom to participate in the Vedic culture in America than in they do in India, and it appears that trend in increasing with every day that goes by. One day we may have to import Vedic culture back into India from the West, where it seems we are starting to take it more seriously, and more intently on protecting it, than they do in India.
    If you cannot do anything else, then at least sign the petition.
    Hari OM,
    Stephen Knapp

-- 

अरब की प्राचीन समृद्ध वैदिक संस्कृति और भारत

अरब देश का भारत, भृगु के पुत्र शुक्राचार्य तथा उनके पोत्र और्व से ऐतिहासिक संबंध प्रमाणित है, यहाँ तक कि "हिस्ट्री ऑफ पर्शिया" के लेखक साइक्स का मत है कि अरब का नाम और्व के ही नाम पर पड़ा, जो विकृत होकर "अरब" हो गया। भारत के उत्तर-पश्चिम में इलावर्त था, जहाँ दैत्य और दानव बसते थे, इस इलावर्त में एशियाई रूस का दक्षिणी-पश्चिमी भाग, ईरान का पूर्वी भाग तथा गिलगित का निकटवर्ती क्षेत्र सम्मिलित था। आदित्यों का आवास स्थान-देवलोक भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित हिमालयी क्षेत्रों में रहा था। बेबीलोन की प्राचीन गुफाओं में पुरातात्त्विक खोज में जो भित्ति चित्र मिले है, उनमें विष्णु को हिरण्यकशिपु के भाई हिरण्याक्ष से युद्ध करते हुए उत्कीर्ण किया गया है।
उस युग में अरब एक बड़ा व्यापारिक केन्द्र रहा था, इसी कारण देवों, दानवों और दैत्यों में इलावर्त के विभाजन को लेकर 12 बार युद्ध 'देवासुर संग्राम' हुए। देवताओं के राजा इन्द्र ने अपनी पुत्री ज्यन्ती का विवाह शुक्र के साथ इसी विचार से किया था कि शुक्र उनके (देवों के) पक्षधर बन जायें, किन्तु शुक्र दैत्यों के ही गुरू बने रहे। यहाँ तक कि जब दैत्यराज बलि ने शुक्राचार्य का कहना न माना, तो वे उसे त्याग कर अपने पौत्र और्व के पास अरब में आ गये और वहाँ 10 वर्ष रहे। साइक्स ने अपने इतिहास ग्रन्थ "हिस्ट्री ऑफ पर्शिया" में लिखा है कि 'शुक्राचार्य लिव्ड टेन इयर्स इन अरब'। अरब में शुक्राचार्य का इतना मान-सम्मान हुआ कि आज जिसे 'काबा' कहते है, वह वस्तुतः 'काव्य शुक्र' (शुक्राचार्य) के सम्मान में निर्मित उनके आराध्य भगवान शिव का ही मन्दिर है। कालांतर में 'काव्य' नाम विकृत होकर 'काबा' प्रचलित हुआ। अरबी भाषा में 'शुक्र' का अर्थ 'बड़ा' अर्थात 'जुम्मा' इसी कारण किया गया और इसी से 'जुम्मा' (शुक्रवार) को मुसलमान पवित्र दिन मानते है।
"बृहस्पति देवानां पुरोहित आसीत्, उशना काव्योऽसुराणाम्"-जैमिनिय ब्रा.(01-125)
अर्थात बृहस्पति देवों के पुरोहित थे और उशना काव्य (शुक्राचार्य) असुरों के।
प्राचीन अरबी काव्य संग्रह गंथ 'सेअरूल-ओकुल' के 257वें पृष्ठ पर हजरत मोहम्मद से 2300 वर्ष पूर्व एवं ईसा मसीह से 1800 वर्ष पूर्व पैदा हुए लबी-बिन-ए-अरव्तब-बिन-ए-तुरफा ने अपनी सुप्रसिद्ध कविता में भारत भूमि एवं वेदों को जो सम्मान दिया है, वह इस प्रकार है-
"अया मुबारेकल अरज मुशैये नोंहा मिनार हिंदे।
व अरादकल्लाह मज्जोनज्जे जिकरतुन।1।
वह लवज्जलीयतुन ऐनाने सहबी अरवे अतुन जिकरा।
वहाजेही योनज्जेलुर्ररसूल मिनल हिंदतुन।2।
यकूलूनल्लाहः या अहलल अरज आलमीन फुल्लहुम।
फत्तेबेऊ जिकरतुल वेद हुक्कुन मालन योनज्वेलतुन।3।
वहोबा आलमुस्साम वल यजुरमिनल्लाहे तनजीलन।
फऐ नोमा या अरवीयो मुत्तवअन योवसीरीयोनजातुन।4।
जइसनैन हुमारिक अतर नासेहीन का-अ-खुबातुन।
व असनात अलाऊढ़न व होवा मश-ए-रतुन।5।"
अर्थात-(1) हे भारत की पुण्यभूमि (मिनार हिंदे) तू धन्य है, क्योंकि ईश्वर ने अपने ज्ञान के लिए तुझको चुना। (2) वह ईश्वर का ज्ञान प्रकाश, जो चार प्रकाश स्तम्भों के सदृश्य सम्पूर्ण जगत् को प्रकाशित करता है, यह भारतवर्ष (हिंद तुन) में ऋषियों द्वारा चार रूप में प्रकट हुआ। (3) और परमात्मा समस्त संसार के मनुष्यों को आज्ञा देता है कि वेद, जो मेरे ज्ञान है, इनके अनुसार आचरण करो।(4) वह ज्ञान के भण्डार साम और यजुर है, जो ईश्वर ने प्रदान किये। इसलिए, हे मेरे भाइयों! इनको मानो, क्योंकि ये हमें मोक्ष का मार्ग बताते है।(5) और दो उनमें से रिक्, अतर (ऋग्वेद, अथर्ववेद) जो हमें भ्रातृत्व की शिक्षा देते है, और जो इनकी शरण में आ गया, वह कभी अन्धकार को प्राप्त नहीं होता।
इस्लाम मजहब के प्रवर्तक मोहम्मद स्वयं भी वैदिक परिवार में हिन्दू के रूप में जन्में थे, और जब उन्होंने अपने हिन्दू परिवार की परम्परा और वंश से संबंध तोड़ने और स्वयं को पैगम्बर घोषित करना निश्चित किया, तब संयुक्त हिन्दू परिवार छिन्न-भिन्न हो गया और काबा में स्थित महाकाय शिवलिंग (संगे अस्वद) के रक्षार्थ हुए युद्ध में पैगम्बर मोहम्मद के चाचा उमर-बिन-ए-हश्शाम को भी अपने प्राण गंवाने पड़े। उमर-बिन-ए-हश्शाम का अरब में एवं केन्द्र काबा (मक्का) में इतना अधिक सम्मान होता था कि सम्पूर्ण अरबी समाज, जो कि भगवान शिव के भक्त थे एवं वेदों के उत्सुक गायक तथा हिन्दू देवी-देवताओं के अनन्य उपासक थे, उन्हें अबुल हाकम अर्थात 'ज्ञान का पिता' कहते थे। बाद में मोहम्मद के नये सम्प्रदाय ने उन्हें ईष्यावश अबुल जिहाल 'अज्ञान का पिता' कहकर उनकी निन्दा की।
जब मोहम्मद ने मक्का पर आक्रमण किया, उस समय वहाँ बृहस्पति, मंगल, अश्विनी कुमार, गरूड़, नृसिंह की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित थी। साथ ही एक मूर्ति वहाँ विश्वविजेता महाराजा बलि की भी थी, और दानी होने की प्रसिद्धि से उसका एक हाथ सोने का बना था। 'Holul' के नाम से अभिहित यह मूर्ति वहाँ इब्राहम और इस्माइल की मूर्त्तियो के बराबर रखी थी। मोहम्मद ने उन सब मूर्त्तियों को तोड़कर वहाँ बने कुएँ में फेंक दिया, किन्तु तोड़े गये शिवलिंग का एक टुकडा आज भी काबा में सम्मानपूर्वक न केवल प्रतिष्ठित है, वरन् हज करने जाने वाले मुसलमान उस काले (अश्वेत) प्रस्तर खण्ड अर्थात 'संगे अस्वद' को आदर मान देते हुए चूमते है।
प्राचीन अरबों ने सिन्ध को सिन्ध ही कहा तथा भारतवर्ष के अन्य प्रदेशों को हिन्द निश्चित किया। सिन्ध से हिन्द होने की बात बहुत ही अवैज्ञानिक है। इस्लाम मत के प्रवर्तक मोहम्मद के पैदा होने से 2300 वर्ष पूर्व यानि लगभग 1800 ईश्वी पूर्व भी अरब में हिंद एवं हिंदू शब्द का व्यवहार ज्यों का त्यों आज ही के अर्थ में प्रयुक्त होता था।
अरब की प्राचीन समृद्ध संस्कृति वैदिक थी तथा उस समय ज्ञान-विज्ञान, कला-कौशल, धर्म-संस्कृति आदि में भारत (हिंद) के साथ उसके प्रगाढ़ संबंध थे। हिंद नाम अरबों को इतना प्यारा लगा कि उन्होंने उस देश के नाम पर अपनी स्त्रियों एवं बच्चों के नाम भी हिंद पर रखे।
अरबी काव्य संग्रह ग्रंथ ' सेअरूल-ओकुल' के 253वें पृष्ठ पर हजरत मोहम्मद के चाचा उमर-बिन-ए-हश्शाम की कविता है जिसमें उन्होंने हिन्दे यौमन एवं गबुल हिन्दू का प्रयोग बड़े आदर से किया है । 'उमर-बिन-ए-हश्शाम' की कविता नयी दिल्ली स्थित मन्दिर मार्ग पर श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर (बिड़ला मन्दिर) की वाटिका में यज्ञशाला के लाल पत्थर के स्तम्भ (खम्बे) पर काली स्याही से लिखी हुई है, जो इस प्रकार है -
" कफविनक जिकरा मिन उलुमिन तब असेक ।
कलुवन अमातातुल हवा व तजक्करू ।1।
न तज खेरोहा उड़न एललवदए लिलवरा ।
वलुकएने जातल्लाहे औम असेरू ।2।
व अहालोलहा अजहू अरानीमन महादेव ओ ।
मनोजेल इलमुद्दीन मीनहुम व सयत्तरू ।3।
व सहबी वे याम फीम कामिल हिन्दे यौमन ।
व यकुलून न लातहजन फइन्नक तवज्जरू ।4।
मअस्सयरे अरव्लाकन हसनन कुल्लहूम ।
नजुमुन अजा अत सुम्मा गबुल हिन्दू ।5।
अर्थात् - (1) वह मनुष्य, जिसने सारा जीवन पाप व अधर्म में बिताया हो, काम, क्रोध में अपने यौवन को नष्ट किया हो। (2) अदि अन्त में उसको पश्चाताप हो और भलाई की ओर लौटना चाहे, तो क्या उसका कल्याण हो सकता है ? (3) एक बार भी सच्चे हृदय से वह महादेव जी की पूजा करे, तो धर्म-मार्ग में उच्च से उच्च पद को पा सकता है। (4) हे प्रभु ! मेरा समस्त जीवन लेकर केवल एक दिन भारत (हिंद) के निवास का दे दो, क्योंकि वहाँ पहुँचकर मनुष्य जीवन-मुक्त हो जाता है। (5) वहाँ की यात्रा से सारे शुभ कर्मो की प्राप्ति होती है, और आदर्श गुरूजनों (गबुल हिन्दू) का सत्संग मिलता है ।
- विश्वजीत सिंह 'अनंत'

सबको होली की बधाइ : happy holi to all : 8th march


सबको होली की बधाइ : happy holi to all : 8th march


       

H  A  P  P  Y     H  O  L  I 



देखिये एक  , बरसाने की लठ्ठमार होली  
see one holi in barsaanaa : 

और एक होली अमेरिका में 
and another in USA: 

holi a festival for the winning of god's love of prahalaad over the ego of his father hiranya-kashipu
होली : एक त्यौहार, एक जश्न , प्रहलाद के भगवद-प्रेम कि जीत , और उसके पिता, हिरन्यकशिपू , के अहंकार कि हार का  :
    

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आज बिरज में होली रे रसिया ........
    

बुरा न मानो होली है 
        
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आयुर्वेदिक दोहे (कृपया आप लोग इसे कॉपी करके कही रख ले ताकि आगे काम आये )

1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय।
दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।

2.मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल।
मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।।

3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम।
खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।

4.छिलका लेंय इलायची,दो या तीन गिराम।
सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।

5.अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय।
बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ जाय।।

6.गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार।
सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।।

7.खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय।
दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।।

8.रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल।
खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।

9.भून मुनक्का शुद्ध घी,सैंधा नमक मिलाय।
चक्कर आना बंद हों,जो भी इसको खाय।।

10.मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम।
तीन बार दिन में पियें, पथरी से आराम।।

11.दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय।
पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर जाय।।

12.आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय।
पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।।

13.सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम।
दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।

14.एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाइ।
चीनी सँग लें बीस दिन,पथरी दे न दिखाइ।।

15.खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम।
लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।

16.बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय।
गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।

17.लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय।
इसको नियमित खाय तो,पथरी बाहर आय।।

18.दामिड़(अनार) छिलका सुखाकर,पीसे चूर बनाय।
सुबह-शाम जल डाल कम, पी मुँह बदबू जाय।।

19. चूना घी और शहद को, ले सम भाग मिलाय।
बिच्छू को विष दूर हो, इसको यदि लगाय।।

20. गरम नीर को कीजिये, उसमें शहद मिलाय।
तीन बार दिन लीजिये, तो जुकाम मिट जाय।।

21. अदरक रस मधु(शहद) भाग सम, करें अगर उपयोग।
दूर आपसे होयगा, कफ औ खाँसी रोग।।

22. ताजे तुलसी-पत्र का, पीजे रस दस ग्राम।
पेट दर्द से पायँगे, कुछ पल का आराम।।

23.बहुत सहज उपचार है, यदि आग जल जाय।
मींगी पीस कपास की, फौरन जले लगाय।।

24.रुई जलाकर भस्म कर, वहाँ करें भुरकाव।
जल्दी ही आराम हो, होय जहाँ पर घाव।।

25.नीम-पत्र के चूर्ण मैं, अजवायन इक ग्राम।
गुण संग पीजै पेट के, कीड़ों से आराम।।

26.दो-दो चम्मच शहद औ, रस ले नीम का पात।
रोग पीलिया दूर हो, उठे पिये जो प्रात।।

27.मिश्री के संग पीजिये, रस ये पत्ते नीम।
पेंचिश के ये रोग में, काम न कोई हकीम।।

28.हरड बहेडा आँवला चौथी नीम गिलोय,
पंचम जीरा डालकर सुमिरन काया होय॥

29.सावन में गुड खावै, सो मौहर बराबर पावै॥

आज का छिद्रान्वेषण--- अशोक स्तम्भ का अपमान ,.होलिका दहन.. डा श्याम गुप्त....


" छिद्रान्वेषण " को प्रायः एक अवगुण की भांति देखा जाता है, इसे पर दोष खोजना भी कहा जाता है...(fault finding). परन्तु यदि सभी कुछ ,सभी गुणावगुण भी ईश्वर - प्रकृति द्वारा कृत/ प्रदत्त हैं तो अवगुणों का भी कोई तो महत्त्व होता होगा मानवीय जीवन को उचित रूप से परिभाषित करने में ? जैसे-- कहना भी एक कला है, हम उनसे अधिक सीखते हैं जो हमारी हाँ में हाँ नहीं मिलाते , 'निंदक नियरे राखिये....' नकारात्मक भावों से ..... आदि आदि ... मेरे विचार से यदि हम वस्तुओं/ विचारों/उद्घोषणाओं आदि का छिद्रान्वेषण के व्याख्यातत्व द्वारा उन के अन्दर निहित उत्तम हानिकारक मूल तत्वों का उदघाटन नहीं करते तो उत्तरोत्तर, उपरिगामी प्रगति के पथ प्रशस्त नहीं करते आलोचनाओं / समीक्षाओं के मूल में भी यही भाव होता है जो छिद्रान्वेषण से कुछ कम धार वाली शब्द शक्तियां हैं। प्रस्तुत है  आज का छिद्रान्वेषण---
१. अशोक स्तम्भ का अपमान और रेलवे ...
 ----- यह तो ठीक ही है...इस अपमान से बचना चाहिए हम सब को , सरकारी संस्थानों का अपराध तो अक्षम्य है ।
---परन्तु यक्ष-प्रश्न यह है कि क्या वास्तव में किसी ने आजतक ऐसी टू , थ्री  कोचों में इन टायलेट पेपरों को कभी देखा है , प्रयोग किया है ....?????
२.क्या  होलिका दहन शव-दाह का प्रतीक है  .....अब देखिये सामने के समाचार में , क्या कहा जारहा है....तथाकथित आचार्य जो १००००० पेड़ लगाने की मुहिम चलाये हुए हैं । ऐसे अज्ञानी जन आचार्य बन कर आयेंगे तो यही होगा कि १००००० लाख पेड़ लगाने की व्यर्थ की  मुहिम चलाकर अपना नाम कमाएंगे ..बस...जो कहीं   भी नहीं दिखाई देंगे ....आखिर यूंही स्कूल--लान, पार्कों में पेड़ लगाने से क्या होगा?  वहां तो संस्थानों के माली आदि होते ही हैं ..पेड़ भी लगाए होते हैं ....पेड़ों की भीड़ लगाकर क्या हासिल होना है....
                  आगे देखिये ..पार्कों , खाली प्लाट , रेलवे लाइन के किनारे होली जलाई जाय  ...
बताइये  यह उचित है....रेलवे लाइन के किनारे होली दहन या इंजिन-ट्रेन दहन.....पब्लिक का पटरियों पर कटन.....वाह ! ....पार्कों को  होली दहन से बर्बाद कराने का इरादा है क्या ?
......बस्ती में खाली प्लाट के  आसपास  प्राय: दूसरे घर होते हैं ...और  शहर से बाहर होली-दहन का कोई अर्थ ही नहीं ।
---------------ऐसी सारी बातें किसी भी अच्छे मुहिम पर पानी फेर सकती हैं....
                

मुसलमानों को 18 फीसद आरक्षण : क्या बाकी के धर्म धोका हैं ! नकली हैं !


मुसलमानों को 18 फीसद आरक्षण ! बाकी अल्पसंख्यक कहाँ जायेंगे ? कौन बताएगा ?

mus1.jpg    

मुसलमानों को 18 फीसद आरक्षण 


मायावती ने भी की मुसलमानों के आरक्षण की वकालत!


मुसलमानों को आरक्षण देंगे?


क्या बुराई है , जब वो अल्प संख्या में हैं तो जरुर दें . पर ये बाकी के अल्पसंख्यक क्या किसी और देश के हैं !

HINDUISM - about 82%
ISLAM - about 12%
CHRISTIANITY - about 2.5%
SIKHISM - about 2%
BUDDHISM - about 0.7%
JAINISM - about 0.5%
ZOROASTRIANISM - about 0.01%
JUDAISM - about 0.0005%

क्या बाकी के  धर्म धोका हैं ! नकली हैं ! 

आखिर क्या कारण हैं कि ये १२% , बाकि के ८८% पर भारी हैं ! ज़रा अपने गिरेबान में झांकिये . 

कुछ तो होगा उनमें कमाल , कुछ तो अल्लाह मियां  में खासियात हैं कि कब्रों के ऊपर चादरें चढाने,  केवल हिंदू ही जाते हैं , क्योंकि इस्लाम के अनुसार तो अल्लाह के सिवा ,  कब्रों की  पूजा करना , कुफ्र है . 

जब देवताओं , भगवानों कि ताकत खतम हो गयी तभी तो उन्हें कब्रों कि शरण में जाना पड़ता है . 

काश हमारे देवता भी कुछ भला कर पाते !

चुनावों में बड़ा मुद्दा है मुस्लिम आरक्षण। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी अपने अपने तरीके से इसे लागू करने की बात कह रही हैं। बीजेपी और बीएसपी अपने अपने तरीके से इससे बच रही हैं। ठीक है कि सब पार्टियां वोट के चक्कर में हैं, लेकिन मुद्दा तो है। देश का बड़ा मुसलमान तबका पिछड़ा हैं। उसे आगे लाना है। 

आखिर ये तथाकथित धर्मनिरपेक्ष देश कब मुसलामानों कि सुनेगा !