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विधायिका का धर्मांतरण

इस माह की दो ख़बरें -

1- सिलचर की हिन्दू महिला विधायक ने अपनी ढ़ाई वर्ष की बच्ची को छोड़कर अपने मात्र एक माह पूर्व फेस बुक पर परिचित हुये मुस्लिम मित्र से इस्लाम स्वीकार करने के बाद विवाह कर लिया है।
यह घटना आसाम की है जहाँ बांग्ला देशी घुसपैठिये मुस्लिमों की बहुतायत है। इस घटना के कुछ बिन्दु विचारणीय हैं। पहला यह कि क्या कोई जनप्रतिनिधि मात्र एक माह के फेसबुकिया परिचय में किसी अनदेखे-अनजाने व्यक्ति से इतनी प्रभावित हो सकती है कि वह अपने पति और छोटी सी बच्ची का परित्याग कर धर्मांतरण करने और पूर्व पति को तलाक दिये बिना दूसरे विवाह का इतना बड़ा कदम उठा सकती है? दूसरा यह कि, किसी जनप्रतिनिधि के लिये नैतिक दृष्टि से ऐसा करना कहाँ तक उचित है? तीसरा यह कि, हिन्दू महिलायें एवम् लड़कियाँ क्यों धर्मांतरित हो मुस्लिम बन रही हैं, मुस्लिम लड़कियाँ हिन्दू क्यों नहीं बन रहीं? चौथा यह कि, हिन्दू धर्म में ऐसी क्या कमियाँ हैं और इस्लाम में ऐसा क्या आकर्षण है जिसके कारण हिन्दू लड़कियाँ अपने पूर्वजों के धर्म से विद्रोह कर एक आयातित धर्म की अनुयायी बन रही हैं? पाँचवाँ यह कि, क्या अब भारत में धर्मांतरण पर कठोर प्र्रतिबन्ध नहीं लगना चाहिये?
व्यक्तिगत रूप से पूछा जाय तो किसी भी देश के मौलिक धर्म का परित्याग कर किसी विदेशी धरती पर जन्मे धर्म का अनुसरण करना मेरी दृष्टि में देशद्रोह की श्रेणी में रखा जाना चाहिये, क्योंकि यहाँ धर्मांतरण का उद्देश्य धार्मिक होना नहीं है बल्कि एक समुदाय विशेष की जनसंख्यावृद्धि करना भर है जिसका स्पष्टतः राजनीतिक उद्देश्य है। हिन्दू धर्म का परित्याग करने वाले से पूछा जाना चाहिये कि वह हिन्दू धर्म के नकारात्मक कारणों को समाज के सामने सपष्ट करे, यदि वह ऐसा नहीं कर पाता है तो उसका धर्मांतरण अमान्य घोषित कर दिया जाना चाहिये।
यहाँ मैं इस्लाम का विरोध नहीं कर रहा बल्कि धर्मांतरण जैसी निकृष्ट मानसिकता का विरोध कर रहा हूँ।
जब भारत में मुस्लिम नेताओं द्वारा शरीयत कानून लागू किये जाने की माँग की जाती हो, धर्मांतरण के राजनीतिक कारण स्पष्ट हों, पाकिस्तान में हिन्दू लड़्कियों की इज़्ज़त तार-तार हो रही हो, म्याँमार से भगाये गये लाख़ों मुस्लिमों को भारत में शरण दिये जाने की वकालत की जाती हो, पाकिस्तान से भगाये गये भारत में शरण की भीख माँगते कुछ सौ हिन्दुओं को दिल्ली पुलिस की लाठियों का सामना करना पड़ता हो ....तब भारत के एक स्वाभिमानी हिन्दू को यह सोचने के बाध्य होना चाहिये कि क्यों नहीं भारत में धर्मांतरण को अपराध घोषित किया जाना चाहिये।
मैं पुनः इस बात पर बल दे रहा हूँ कि धर्मांतरण करने वाले को धर्म से कोई लेनादेना नहीं होता ...धर्म को तो वे जानते तक नहीं हैं ...जानते होते तो सनातन धर्म का परित्याग नहीं करते, भारत में होनेवाले धर्मांतरणों का एकमात्र कारण राजनीतिक है जो भारत के लिये अशुभ है। समय रहते यदि इस पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया तो भारत को इस्लामिक देश बनने से कोई शक्ति रोक नहीं सकेगी।
2- दूसरी घटना है रायपुर जिले में एक महिला पुलिस कर्मचारी के साथ बलात्कार की। कुछ गुण्डों ने एक महिला पुलिस कर्मचारी को लूटा फिर उसकी अस्मत भी लूट ली। राज्य का उत्तरदायित्व है अपने नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा करना ..यदि वह ऐसा कर पाने में सक्षम नहीं है तो उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिये। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की समानांतर सरकार, भ्रष्टाचार की खुली छूट और अधिकारियों पर शासन के अनियंत्रण से एक ऐसी तस्वीर बनती है जो भयावह है। हम जानना चाहते हैं कि आख़िर सत्ता की जनता के हितों के प्रति प्रतिबद्धता क्या है ?      
       

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

yah love zhad hai,

बेनामी ने कहा…

muslim sale yahi karte hai