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सरकार बलातकारियों-भ्रष्टाचारियों-आतंकवादियों व कालेधन वालों के साथ क्यों?

p6आप सब चौंक गए होंगे कि क्यों सरकार बालातकारियों का साथ दने के लिए बालातकार के बिरूद्ध आबाज उठाने वालों पर हर तरह की क्रूरता करने के बाद प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने पर क्यों तुल गई है?
p2मामला सिर्फ बालातकार का ही नहीं बल्कि भ्रषटाचार व काले धन का विरोध करने बालों के साथ भी सरकार ने इसी तरह की क्रूरता की और बाद में सरकार उन्हें भी बदनाम करने पर तुल गई क्यों?
1552E561935CF20F_645_0बालातकार और भर्ष्टाचार व कालेधन के अतिरिक्त इसलामिक आतंकवाद का विरोध करने बालों पर भी सरकार ने बेहिसाब जुल्म ढाय लेकिन जब जुल्मों का सामना करते हुए भी ये लोग आतंकवाद के बिरूद्ध आबाज उठाते रहे तो सरकार ने जेलों में बन्द इसलामिक आतंकवादियो को छोड़कर उनकी जगह आतंकवाद का विरोध करने वाले देशभक्तों, साधु,सन्तों-साधवियों व सैनिकों और सुरक्षाबलों के अनेक जवानों को जेलों में ठूंस दिया क्यों ?
ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनके जबाब हर देशभक्त भारतीय जानना चाहता है। मेरे विचार में इनसबका एक ही उत्र है कि कि सरकार के आका खानदान का इन सब कुकर्मों में सीधा हाथ है इसलिए सरकार इनमें से किसी भी मुद्दे को खत्म करवाने के लिए सख्त कानून बनाने की मां करने बालों का हर तरह से बिरोध करती है।
Umar abdulaimagesCAOE1P3Qउधारण  के लिए इसलामिक आतंकवादियों को आत्मघाती हमलों की ट्रेनिंग देने में माहिर हमास से सबन्ध रखने वाला ओबैसी राहुल विन्शी का जिगरी यार है व इसलामिक आतंकवादियों के हित में आबाज उठाने वाला उमर आबदुला भी इसी राहुल विन्शी का यार है बटला हाऊस में पुलिस के जवान पर हमला करने वाले आतंकवादियों को बचाने के लिए आबाज उठाने में भी इसी राहुल विन्शी का गुरू गद्दार दिगविजय सिंह सबसे आगे था……
p5रही बालातकार की बात तो बालातकार में भी राहुल विन्शी हाथ अजमा चुका है इस पर सामुहिकबलातकार का ममाल दर्ज हुआ था जिसमें लड़ी व लड़ी के मात-पिता को गायब करवाने के बाद सरकीर न् अपनी शक्ति का दुरूपियोग कर इसे बचा लिया…
soniya 9p3काले धन और भर्ष्टाचार में तो इस राहुल विन्शी की मां एडबीज एंटोनिया अलवीना माइनो का कोई सानी नहीं अब आप ही बताओ इस इटालियन अंग्रेज की गुलाम सरकार क्यों न बालातकारियों-भर्ष्टाचारियों ,आतंकवादियों व काले धन वालों को कड़ी सजा की मांग करने वालों   के बिरूद्ध खड़ी हो?

जब आप दूसरे की मां-बहन-बेटी का अपमान करते हैं तो बासतब में आप अपनी मां बहन बेटी का अपमान करवाने के लिए एक महिलाविरोधी माहौल वना रहे होते हैं

rapहमीरपुर जिले के मतलेड़ी गांव की छठी में पढ़ने वाले छात्रा जो पाठसालाल से घर आ रही थी को गांव के ही गुंड़े ने बीड़ी लाने के बहाने बुलाया और फिर उसका बलातकार करने के बाद उसके सिरपर पत्थर मार-मार कर उसका कतल कर दिया क्या अब भी आप कहेंगे कि न्यालया द्वारा फांसी की सजा सुनाए गए 8 गुंडो की सजा माफ करने वाली कांग्रेस सरकार बालातकारियों की मददगार नहीं है
आो बालातकारियोंके मददगारियोंको वे चाहे कोई भी हों के लिए फांसी की सजा सुनिशेचित करें व ऐसे बालातकारियों का पक्ष लेने वाले दानबाधिकारबादियों को सबक सिखाने का प्रण करें
हमीरपुर जिले के टिहरी गाँव की लड़की
जो कि दशवीं गांव की प्राथमिक पाठशाला में पढ़ती थी के साथ हटली गांव के 30 वर्षीय गुंडे ने बालातकार करने की कोशिश करते हुए उसकी योनी में चाकू/बलेड से जखम कर दिए आज वो गुंडा खुला घूमता है किया अब भी आप बालातकारियों को फांसी की सजा देने का विरोध करने वाले दानबाधिकारबादियों काो सबक सिखाने वाले क्राँतिकारियों का समर्थन नहीं करेंगे
मामला दब गयाक्योंकि एकतो ये गरीब थी और दूसरा सहरी मिडीया की पहुंच से कोसों दूर
सिर्फ पुलिस बालों को सजा की बात कर रहे हैं वो बासतब में बालातकारियों को फांसी की सजा से बचाने के लिए जनता का ध्यान बंटाना चाहते हैं इनसे साबधान
जब लालकृष्ण अडवानी जी ने वालातकारियों को फांसी दने के लिए कानून बनाने की कोशिस शुरू की थी अगर उस वक्त ये लोग फांसी का विरोध करने वाले दानबाधिकारियों के बिरूध खड़े हो जाते तो आज तक ये कानून कब का लागू हो चुका होता फिर भी देर आए दुरूशत आए
बलातकारियों को हर हाल में शीघ्रताशीघ्र फांसी सजा मिलनी चाहिए लेकिन प्रदर्शनकारियों को सरकार के गुलाम सुरक्षाबलों पर हमला नहीं करना चाहिए वल्कि फांसी की सजा का विरोध करने वाले नेताओ, पत्रकारों और तथाकथित समासेवकों व दानबाधिकारबादियों को ढूंढ-ढूंढ कर शबकसिखाना चाहिए
जिस इटालियन अंग्रेज के सपोले पर अभी-अभी बालात्कार का केश CBI की मदद से खत्म हुआ हो वो भला क्यों बलात्कारियों का फांसी की सजा देने का समर्थन करेगी

अमर बलिदानी खुदीराम बोस को नमन: तीन दिसंबर को जयंती पर विशेष



भारत की जंग ए आजादी का इतिहास क्रांति की एक से बढ़कर एक घटनाओं से भरा पड़ा है.इसी कड़ी में खुदीराम बोस का भी नाम शामिल है जो केवल 19 साल की उम्र में देश के लिए मर मिटे.पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में तीन दिसंबर 1889 को जन्मे खुदीराम बोस ने आजादी की लड़ाई में शामिल होने के लिए नौवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी थी. उन्होंने रेवोल्यूशनरी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और वंदेमातरम लिखे पर्चे वितरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. बंगाल विभाजन के विरोध में 1905 मे चले आंदोलन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही.
इतिहासकार शिरोल ने खुदीराम के बारे में लिखा है कि बंगाल के इस वीर को लोग अपना आदर्श मानने लगे थे.
साहस के मामले में खुदीराम का कोई जवाब नहीं था. 28 फरवरी 1906 को जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तो वह कैद से भाग निकले. दो महीने बाद वह फिर से पकड़े गए  लेकिन 16 मई 1906 को उन्हें रिहा कर दिया गया.

प्रोफेसर कांति प्रसाद के अनुसार खुदीराम का क्रांतिकारी व्यक्तित्व बचपन में ही दिखाई देने लगा था. एक बार खुदीराम ने क्रांतिकारी नेता हेमचंद्र कानूनगो का रास्ता रोककर अंग्रेजों को मारने के लिए उनसे बंदूक मांगी.
खुदीराम की मांग से हेमचंद्र यह सोचकर आश्चर्यचकित रह गए कि इस बालक को कैसे पता कि उनके पास बंदूक मिल सकती है. खुदीराम ने छह दिसंबर 1907 को नारायणगढ़ रेलवे स्टेशन पर बंगाल के गवर्नर की विशेष ट्रेन पर हमला किया लेकिन वह बच गया. उन्होंने 1908 में दो अंग्रेज अधिकारियों वाटसन और पैम्फायल्ट फुलर पर बम से हमला किया  लेकिन ये दोनों भी बच निकले.
बंगाल का यह वीर क्रांतिकारी मुजफ्फरपुर के सेशन जज किंग्सफोर्ड से बेहद खफा था. इस जज ने कई क्रांतिकारियों को कड़ा दंड दिया था . खुदीराम ने अपने साथी प्रफुल्ल चंद चाकी के साथ मिलकर किंग्सफोर्ड को मारने की योजना बनाई. 
दोनों मुजफ्फरपुर आए और 30 अप्रैल 1908 को सेशन जज की गाड़ी पर बम से हमला किया लेकिन उस समय इस गाड़ी में किंग्सफोर्ड की जगह उसकी परिचित दो यूरोपीय महिलाएं सवार थीं जो मारी गईं. इन क्रांतिकारियों को इसका काफी अफसोस हुआ.पुलिस उनके पीछे लगी और वैनी रेलवे स्टेशन पर उन्हें घेर लिया. खुदीराम पकड़े गए जबकि प्रफुल्ल चंद चाकी ने खुद को गोली मारकर जान दे दी.
ग्यारह अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में खुदीराम को फांसी दे दी गई. देश के लिए बलिदान  होने के समय खुदीराम की उम्र मात्र 19 साल थी. बलिदान के बाद यह वीर इतना प्रसिद्ध हो गया कि बंगाल के जुलाहे खुदीराम’ लिखी धोती बुनने लगे.
शिरोल ने लिखा है ‘‘बंगाल के राष्ट्रवादियों के लिए वह वीर शहीद और अनुकरणीय हो गया. विद्यार्थियों तथा अन्य लोगों ने शोक मनाया . स्कूल बंद रहे और नौजवान ऐसी धोती पहनने लगे जिनकी किनारी पर खुदीराम लिखा होता था.’’
साभार :सहारा