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जब आप दूसरे की मां-बहन-बेटी का अपमान करते हैं तो बासतब में आप अपनी मां बहन बेटी का अपमान करवाने के लिए एक महिलाविरोधी माहौल वना रहे होते हैं

rapहमीरपुर जिले के मतलेड़ी गांव की छठी में पढ़ने वाले छात्रा जो पाठसालाल से घर आ रही थी को गांव के ही गुंड़े ने बीड़ी लाने के बहाने बुलाया और फिर उसका बलातकार करने के बाद उसके सिरपर पत्थर मार-मार कर उसका कतल कर दिया क्या अब भी आप कहेंगे कि न्यालया द्वारा फांसी की सजा सुनाए गए 8 गुंडो की सजा माफ करने वाली कांग्रेस सरकार बालातकारियों की मददगार नहीं है
आो बालातकारियोंके मददगारियोंको वे चाहे कोई भी हों के लिए फांसी की सजा सुनिशेचित करें व ऐसे बालातकारियों का पक्ष लेने वाले दानबाधिकारबादियों को सबक सिखाने का प्रण करें
हमीरपुर जिले के टिहरी गाँव की लड़की
जो कि दशवीं गांव की प्राथमिक पाठशाला में पढ़ती थी के साथ हटली गांव के 30 वर्षीय गुंडे ने बालातकार करने की कोशिश करते हुए उसकी योनी में चाकू/बलेड से जखम कर दिए आज वो गुंडा खुला घूमता है किया अब भी आप बालातकारियों को फांसी की सजा देने का विरोध करने वाले दानबाधिकारबादियों काो सबक सिखाने वाले क्राँतिकारियों का समर्थन नहीं करेंगे
मामला दब गयाक्योंकि एकतो ये गरीब थी और दूसरा सहरी मिडीया की पहुंच से कोसों दूर
सिर्फ पुलिस बालों को सजा की बात कर रहे हैं वो बासतब में बालातकारियों को फांसी की सजा से बचाने के लिए जनता का ध्यान बंटाना चाहते हैं इनसे साबधान
जब लालकृष्ण अडवानी जी ने वालातकारियों को फांसी दने के लिए कानून बनाने की कोशिस शुरू की थी अगर उस वक्त ये लोग फांसी का विरोध करने वाले दानबाधिकारियों के बिरूध खड़े हो जाते तो आज तक ये कानून कब का लागू हो चुका होता फिर भी देर आए दुरूशत आए
बलातकारियों को हर हाल में शीघ्रताशीघ्र फांसी सजा मिलनी चाहिए लेकिन प्रदर्शनकारियों को सरकार के गुलाम सुरक्षाबलों पर हमला नहीं करना चाहिए वल्कि फांसी की सजा का विरोध करने वाले नेताओ, पत्रकारों और तथाकथित समासेवकों व दानबाधिकारबादियों को ढूंढ-ढूंढ कर शबकसिखाना चाहिए
जिस इटालियन अंग्रेज के सपोले पर अभी-अभी बालात्कार का केश CBI की मदद से खत्म हुआ हो वो भला क्यों बलात्कारियों का फांसी की सजा देने का समर्थन करेगी

1 टिप्पणी:

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

अंतिम अनुच्छेद में जिस सत्य (कारण) को आप मौके पर लेकर आये हैं वही असल वजह है बलात्कार जैसे दुष्कर्म पर कठोर सज़ा की तुरंत कार्रवाई न हो पाने की।

सुनील जी, आक्रोश तभी सही-सही व्यक्त हो पाता है जब उसका असंतुलन झलकता है। और वह आपकी अभिव्यक्ति में भलीभाँति व्यक्त हुआ है।