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महारानी जी के बली के बकरे

महारानी जी बड़ी भाग्यशाली हे, उनकी व राजकुमार की  तमाम नाकामियों ,बदनामियों तथा उनपर, उनके परिवार या उनकी पार्टी  पर अनवरत लगते जा रहे  भ्रस्टाचार के आरोपों से तारतार व दागदार  होती जा रही छवि से उनको ,राजकुमार को बचाने नए बलि के बकरे ढूंढ़ कर उनकी बलि चढ़ाकर महारानी जी की छवि चमकाने के प्रयास जोर शोर से चालू हे, महारानी जी को कुछ बोलने की जरुरत ही नहीं हे, उनके चरणों में लुटने को तैयार बेठे चारण टाइप पार्टी के नेता, अयोग्य होते हुए भी उनके आशीर्वाद से मंत्री व अन्य पद पाकर अपने को धन्य समझने वाले लोग, उनकी शान में बिरुदावली गाने वाले कई समाचार चेनल व उनके एंकर रेल घोटालेमें हुयी बदनामी,  व कोयला घोटाले की रिपोर्ट में छेड़ छाड़ पर मिली सुप्रीम कोर्ट की जबरदस्त लताड़ से दागदार हुयी  उनकी छवि को धोने चमकाने में लग गए हे. इसके लिए इन यह जानते हुए भी की महारानी जी की पार्टी में उनकी मर्जी या जानकारी के बिना किसी की ओकात छोटे मोटे निर्णय करने की नहीं हे, फिर इतने बड़े कांड तो महारानी जी की जानकारी,शायद  सहमती भी,  के बिना कोई कर ही नहीं सकता, महारानी जी को बदनामी से बचाने छोटे वजीरों को बलि का बकरा बना उनके पद की बलि ले ली गयी, सारी बदनामी का ठीकरा मुख्य वजीर के सर फोड़ कर पार्टी के चापलूस नेता व महारानी की शान में कसीदे पढ़ते हुए समाचार चेनलों के सवाददाता इस तरह प्रसारित कर रहे हे, महारानी जी  अपनी पार्टी में भ्रष्टाचार बिलकुल बर्दास्त नहीं करती हे, वो खुद चलकर मुख्य वजीर के घर आई और दागी वजीरों को हटाने का अनुरोध किया , और तुरंत दागी वजीरों को हटा दिया गया , वो वजीर यह कहते रहे की वो त्यागपत्र क्यों दे,  क्या सिर्फ उनकी ही गलती हे, उन्होंने तो केवल मुख्य वजीर पर लग रहे घोटालों के आरोपों से उनकी , पार्टी की , व महारानी जी की हो सकने वाली बदनामी बचाने , उनकी व महारानी जी की जनता में ईमानदार व साफ सुथरी छवि की पोल खुलने से बचाने के लिए ही ऐसा गेर क़ानूनी कार्य किया था , फिर उनको ही बलि का बकरा क्यों बनाया जा रहा हे, यह भी प्रचारित किया गया कि  महारानी तो चाहती थी की भ्रष्ट वजीर हटे , पर मुख्य वजीर उनको बचा रहे थे, बेचारे मासूम और भोले या चापलूस व बिकाऊ संवाददाता, क्या नहीं जानते की महारानी जी आगे मुख्य वजीर की क्या ओकात की वो किसी को भी बचाए या हटाये .

       महारानी जी गदगद हे, आपसी अंतर्कलह,अपने अहंकार के लिए बचों की तरह जिद करने,  व एक दुसरे को निचा दिखाने में पार्टी की साख को दाँव पर लगा  मटियामेट करने में महारत हासिल कर चुकी, बार बार मार  खा कर भी नहीं सुधरने का रिकार्ड बना रहे प्रमुख विपक्षी पार्टी से दक्षिण के राज्य की सत्ता छीन कर अपनी सत्ता कायम करने से खुश हे,विपक्षी दल के इन्ही कारणों से मिली जीत को पार्टी के नेता चापलूसी के नए कीर्तिमान बनाने के लिए इस जीत को महारानी व युवराज का करिश्मा,उनके विचारों की जीत,जेसी नयी नयी उपमाओं से सजाकर महारानी व युवराज के गुणगान में बावले हो रहे हे, महारानी जी की बदरंग छवि को धोने का एक साबुन जो मिल गया हे. जैसे किसी भी प्रदेश में पार्टी की हार से उजागर युवराज की नाकामी से उनको बचाने के लिए हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेकर बलि का बकरा बनने की ,परन्तु कहीं भी किसी भी कारण , किसी की भी मेहनत से मिली जीत का श्रेय राजकुमार या महारानी को देने होड़  पार्टी नेताओं में लग जाती हे, ठीक वेसे ही देश की जनता के धन की लूट के अनगिनत आरोपों से महारानी को बचाने के लिए,महारानी को खुश कर उनके आशीर्वाद पाने की होड़ में  ये महारानी के इशारे पर हर अनेतिक, गेर क़ानूनी काम करने को तत्पर रहते हे, जहां महारानी की इच्छा तथा सहमती की बिना कोई साँस भी नहीं ले सकता, वंहा ये दरबारी किसी काम में सफलता मिले वह महारानी का करिश्मा, उनकी लोकप्रियता में वृधि के रूप में जोर शोर से प्रचारित करते हे, परन्तु जब  किसी अनेतिक काम में महारानी की इज्जत मिटटी में मिलती दिखे तो उस काम की बदनामी का पूरा ठीकरा अपने सर फोड़ने यानी  बलि का बकरा बनने की, या कोई बनने को कोई तैयार न हो उसे जबरदस्ती बनाने की   पार्टी में पुरानी परम्परा रही हे.   
        महारानी जी आजकल बहुत समझदार हो गयी हे अपने से बुजुर्ग, राजनीति में माहिर,  अधिक ज्ञानी व समझदार दरबारियो की चापलूसी, महारानी के आशीर्वाद पाने को हमेशा लालायित व उतावले लोगो , तथा विपरीत विचारो के समर्थक दलों के  लालची नेताओ के सहयोग से अपनी सरकार चलाना अच्छीतरह जान  गयी हे.   अपनी सरकार को बचाने दूसरी पार्टी की लोगो को पैसे से खरिदने का कार्य होता  हे, किसी को सरकारी जाँच एजेंसी से जाँच की धमकी दिलवा कर अपनी गिरती सरकार बचाने उनका समर्थन हासिल किया जाता  हे, परन्तु पोल खुलने पर तमाम दरबारी इसकी सारी जिम्मेदारी अपने या दुसरे पर डाल कर महारानी को पाक साफ साबित करने में पूरी उर्जा लगा देते हे, अपने सहयोगी मिडिया के सहयोग से यह प्रचारित करने में लग जाते हे, कि महारानी को इसकी कोई जानकारी नहीं थी,इस घटना से महारानी नाराज हे, इसके लिए मुख्य वजीर या सम्बंधित वजीर जिम्मेदार हे, कोई समाचार चेनल का संवाददाता यह नहीं पूछता की महारानी की जानकारी या सहमती के बिना यह सब करने की उसकी हिम्मत थी .महारानी अपने विदेशी मित्रों का भारत की जनता का बेईमानी व दलाली से लुटा विदेशी बेंको में रखा धन जिस पर पहले की सरकार ने निकालने पर क़ानूनी रोक लगा दी थी, अपने चाकर मंत्रिओं से  उसके विदेशी बेंको पर लगीं रोक हटवा कर उन्हें वो भारत का धन अपने देश ले जाने देती हे, कानून विभाग का मंत्री इसकी सारी  जिम्मेदारी अपने ऊपर लेकर  महारानी की छवि को दागदार होने से बचाने जी जान से लग जाता हे. महारानी देवी की तरह अपने दरबारी भक्त को आशीर्वाद देती हे, और विदेशियों से आशीर्वाद पाकर अपने को धन्य समझने वाले मंत्रीजी गदगद हो जाते हे।   
      महारानी जी की पार्टी को विदेशी तानाशाहों से तेल की दलाली से अपार धन कमाया ,तेल का यह खेल वर्षों चला,  जनता की आँखों में धूल झोंककर महारानी के आज्ञापलक दरबारी गेरकानुनी रूप से अथाह धन कमाते हे, परन्तु एक दिन बेईमानी का घड़ा फूटता हे सारा राज जनता के सामने खुल गया  हे,महारानी जी तनिक भी चिंतित नहीं हे, उनके चेहरे की रहस्यमयी मुस्कान कायम हे,महारानी जानती हे की उसके  सभी चापलूस दरबारी महारानी की चिथड़े चिथड़े होती इज्जत बचने के लिए सम्बंधित मंत्री को बलि का बकरा बना उसकी  बलि चढाने में जुट जाते हे, अपने पद की बलि चढाने से बचाने बकरा खूब उछल कूद मचाता हे, पर महारानी को बचाने  हर अनेतिक कार्य का जिम्मा अपने ऊपर लेने को तत्पर दरबारियो की भीड़ के आगे बेचारे की क्या ओकात आखिर जाना ही पडा . दरबारी अपने लिए पक्षपाती समाचार चेनलों के मार्फ़त महारानी को इस पूरी घटना से मासूम व  अनजान बता  उन्हें नेतिकता की देवी साबित करने को  अपना अहोभाग्य  समझ सुख अनुभव करते हे.कुछ दिन पूर्व  महारानी जी के दामाद पर घोटालों के दाग लगे, गेर क़ानूनी रूप से अथाह धन सम्पति हड़पने के आरोप लगे तो जेसे महारानी की पार्टी में भूचाल ही आगया,महारानी जी बिलकुल परेशान नहीं हे, लगभग पूरी की पूरी पार्टी के बड़े पद वाले वजीर से लेकर छुटभैये नेता तक सारे कामकाज छोड़ महारानी के दामाद को आरोपों से बेगुनाह साबित करने, महारानी जी की मिट्टी में मिलती इज्जत बचाने के एकमात्र कम में जोरशोर से लग गये हे,,पहले बिना जाँच के ही महारानी के हुकम के बन्दे  बड़े बड़े वजीर बिना जाँच के ही उन्हें निर्दोष घोषित कर देते हे, बलि का बकरा ढूंढने के कवायद शुरू हो गयी  हे,देश की जनता को गुमराह करने  तुरंत जाँच बेठा दी जाती हे, जिस देश में किसी भी छोटी सी जाँच में ही जहाँ महीनो, वर्षों लग जाते हे, बहुत जल्दी दामाद को निर्दोष साबित करने वाली  जाँच रिपोर्ट आ जाती हे, महारानी जी के दामाद के गेरकानुनी कार्यों की जाँच  का आदेश देने वाले ईमानदार सरकारी अफसर को पद से हटा दिया जाता हे, 
   लगातार गुणगानो से चापलूस दरबारियो ने जनता में महारानी की छवि इस तरह की बना दी हे की देश की सह्रदय व भोली जनता महारानी के ढोंग भी को भी त्याग समझ लेती हे, पहले गेरकानुनी रूप कई पदों  पर आसीन महारानी जी जब कानून के फंदे में फंसने लगी और मज़बूरी में पद त्याग करना पड़ा , उस पद त्याग को महारानी के दरबारियो ने महान त्याग के रूप में जोर शोर से प्रचारित कराया, जिसमे महारानी जी की चारण गिरी में दरबारियो को भी मात  करते हुए अपने को महाज्ञानी होने के दंभ भरने वाले चन्द समाचार चेनलों व उनके संवाददाता उन्हें त्याग की देवी साबित करने पूरा सहयोग दिया तथा हर समाचार को निष्पक्षता से दिखने के अपने पत्रकारिता धर्म के साथ गद्दारी की। 
  देश की जनता की जल्दी भूलने की बीमारी व मुखोटों के पीछे के असली घ्रणित चेहरो को पहचानने की क्षमता होने की अति आवश्यकता हे, देश को बर्बादी से बचाने गरीबी मंहगाई व भ्रस्टाचार मी महामारी से बचाने के लिए यही एक रास्ता हे , जनता जबतक ऐसे ढोंगियो को पहचान कर सत्ता से बाहर  नहीं करेगी लुटती,पिटती, मरती रहेगी, जेसे कि  किसी गलत बात का विरोध करने पर  अहंकारी सत्ता पक्ष के लोग पुलिस के सहयोग से जनता के साथ करते हे. 

चीन के हाथो एक और पराजय की गवाही देता दौलतबेग ओल्डी


दौलत बेग ओल्डी से चीनी सेना के बनकर हटाये जाने का कांग्रेस सरकार और कांग्रेस पोषित मिडिया

कुछ इस प्रकार ढिंढोरा  पिट रहे हैं जैसे उन्होंने ६२ में चीन द्वारा कब्ज़ा की हुई हजार वर्ग मिल की जमीं वापस पा ली हो .. ज्ञातव्य को की चीन का सीमा विवाद दशको पहले तिब्बत विद्रोह के बाद सन १९५९ में दलाई लामा को भारत में शरण देने के बाद से ही चला है जिसकी परिणिति कांग्रेस के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु  के शासन काल में १९६२ में हुए भारत चीन युद्ध के रूप में हुआ .. हिंदी चीनी भाई  भाई के नारे को देकर तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री चाऊ इन लाई ने भारत पर आक्रमण का आदेश दिया और आधार बनाया मैकमोहन रेखा और हिमालय क्षेत्र की सीमा के निर्धारण को .. उस युद्ध में भारत की पराजय हुई और हमारा लद्दाख और अक्साई चीन की लगभग ७२ हजार वर्गमील जमीं चीन ने कब्ज़ा कर ली .. साथ ही साथ तिब्बत पर चीनी प्रभुत्त्व स्थापित हो गया . हमारे तात्कालिक प्रधानमत्री जवाहर लाल नेहरु उस समय कोट पर लाल गुलाब और सफ़ेद कबूतर उड़ने में व्यस्त थे और हमारा कैलाश जैसा धार्मिक क्षेत्र चीन के कब्जे में चला गया.. इस पराजय के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा को सीमा रेखा के रूप में मान कर विवादों का निपटारा द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से करने का समझौता हुआ जो की भारत के लिए एकतरफ़ा था.. आज त५अक चीन ने अरुणांचल प्रदेश से अपना दावा नहीं छोड़ा है . यहाँ चीन की दोगली नीति इसी बात से परिलक्षित होती है की जिस मैकमोहन रेखा को चीन ने कभी मान्यता नहीं दी उसी के अंतर्गत उसने पाकिस्तान के साथ अपना सीमा निर्धारण कर लिया. 



१९६२ की हार के बाद हिंदुस्थानी सेना ने अपने सामरिक तैयारियों में तेजी तो ले आया मगर कमुनिस्ट शासन में चीन की तैयारियां हिन्दुस्थान से दो कदम आगे ही रही. रक्षा उपकरणों की खरीद में दलाली एवं लालफीताशाही के कारन रक्षा सौदों में देरी ने चीन और भारत की सामरिक तैयारियों और चीन की सामरिक क्षमता में एक बहुत बड़ा अन्तर आ गया जिसे बढ़ने में भारतीय राजनेताओं की ढुलमुल इच्छाशक्ति ने बहुत बड़ा योगदान दिया. युद्ध के बाद सिर्फ इंदिरा गाँधी और अटल बिहारी वाजपेयी ने सिर्फ राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया अन्यथा ज्यादातर प्रधानमंत्री चीन के सामने घुटने टेकने की नीति पर लगे रहे और इसमें सबसे शर्मनाक योगदान मनमोहन सिंह की वर्तमान कांग्रेस सरकार का रहा जिसने संसद में  ये बाद स्वीकारी की चीन ने सैकड़ो बार सीमा का उलंघन किया और भारत सरकार अपनी राजनितिक नपुंसकता का परिचय देते हुए इसे छोटी घटना माना.. सत्य ये है की कांग्रेसी सरकार भय खाने लगी है चीन से और रोज नए नए घोटालों से घरेलू मोर्चे पर दो चार होती कांग्रेस सरकार के पास बिदेशी नीति के स्तर पर आत्मसम्मान ख़तम हो चूका है . इसी कारण पाकिस्तान जैसा देश भी हमारे सैनिको के सर काट के भेजता है और हिन्दुस्थान की सरकार जबाब देने के स्थान पर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में व्यस्त रही है तो कभी हमारे विदेशमंत्री पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को बिरयानी परोसने में व्यस्त रहते हैं .

अभी हाल की घटना में पुनः एक बार चीन ने हिंदुस्थानी सीमा क्षेत्र में लद्दाख के निकट दौलत बेग ओल्डी जो की लद्दाख में आता है में लगभग १९ किलोमीटर तक  अतिक्रमण कर लिया और अपने टेंट लगा लिए . हलाकि भारत सरकार इसे एक स्थानीय मुद्दा मान के आँखें चुरा रही थी मगर इसके पहले भी यदि हम देखें तो मनरेगा के तहत होने वाले काम को लद्दाख में चीन ने पहले भी रुकवाया है और भारत सरकार नपुन्सको की तरह झुकते हुए कार्य बंद कर दिया ..
हाल के दिनों में भारतीय सेना के चीन से सटी सीमा पर दौलत बेग ओल्डी
फुक्चे और न्योमामें ढांचागत सुविधाओं के निर्माण कार्य से चीन असहज हो रहा था और उसे रोकने के उद्देश्य से ये बार बार अतिक्रमण किया गया .
अबकी बार चीन ने पीछे हटने की शर्त रखते हुए गतिरोध तो सुलझाने के लिए चुमार जो की एक सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण पोस्ट थी वह से भारतीय सेना के बंकर हटाने और भविष्य में  पूर्वी लद्दाख में स्थायी निर्माण का काम बंद करने और कोई गतिविधि न करने की शर्त रख दी कांग्रेस सरकार ने चीन के सामने घुटने टेकते हुए और अपनी इज्जत बचने के उद्देश्य से चुमार से सेनाएं वापस बुला ली  वर्तमान स्थिति ये है की  चीनी सेना लद्दाख के देपसांग से तब गईजब इंडियन आर्मी चुमार से बंकर नष्ट करने के लिए राजी हुई। और पुनः चीन ने चालबाजी दिखाते हुए 19 किलोमीटर अतिक्रमण की हुई जमीन से सिर्फ २ किलोमीटर ही पीछे हटा है यानि अभी भी भारतीय भूभाग में चीन का अतिक्रमण है और भारतीय सेना पीछे हटती जा रही है हालत छोटे स्तर वैसे ही हैं जैसे १९६२ में थे अंतर इतना है की उस समय हमारे जवानों को प्रतिउत्तर देने की छुट थी आज उनके हाथ कांग्रेस सरकार की निकृष्ट बिदेश नीति  ने बांध रखें हैं.
एक दलाल किस्म के पत्रकार ने इसे कारगिल से बड़ी विजय के रूप में दिखाया मगर कारगिल में वाजपेयी जी के आदेश पर हमारे सीमा में घुस आये पाकिस्तानियों को हमने भगाया था न की अपने ही क्षेत्र में पीछे हटते हुए स्वयं के बनकर नष्ट किये थे .. आज स्थिति है की जिस जगह से भारतीय सेना चीन के दबाव एवं कांग्रेस सरकार के आदेश से पीछे हटी है वो अब भारतीय क्षेत्र से नो मैन्स लैंड(NO MANS LAND)  बन गया है और थोड़े दिन बाद चीन के कब्जे में ... 
चीन के लिए हिन्दुस्थान एक बड़ा बाजार है शायद हिन्दुस्थान की सरकार ने दृढ राजनितिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया होता तो हम सरे व्यापारिक सम्बन्ध चीन से ख़तम करके उस पर एक दबाव बना सकते थे इस कार्य में सहर्ष चीन का प्रतिद्वंदी अमरीका भी हमारे साथ होता . यथार्थ ये है की कांग्रेस शासन में चीन को उसकी भाषा में जबाब देने का सामर्थ्य किसी को नहीं है और हमारे सभी पडोसी धीरे धीरे हमारी सीमाओं का अतिक्रमण कर रहे हैं कभी बांग्लादेश में तो कभी पाकिस्तान तो कभी चीन यहाँ तक की नेपाल जैसा  देश भी अब भारत की सीमाओं में घुसने लगा है ..
शायद ये कांग्रेस की नपुंसक बिदेशनीति और रक्षानीति का पार्श्व प्रभाव है. दुखद ये है की मिडिया का एक तबका कांग्रेस की इस नाकामी और हिन्दुस्थान की एक और हार को अपनी विजय के रूप में प्रदर्शित कर रहा है और वास्तविकता के धरातल पर हमने कई किलोमीटर भूमि फिर खो दी भारत माँ का एक और अंग भंग कांग्रेस सरकार की नीतियों ने कर दिया.. 


Responsibility as Parents

Responsibility as Parents

maharani ji ki muskarahat


महारानी जी के चहरे पर हमेशा की तरह रहने वाली रहस्यमय मुस्कराहट कायम हे, महारानी जी की पार्टी के अपने आप को महारानी जी के सबसे बड़े खिदमतगार साबित करने की होड़ में लगे रहने वाले बड़े नेताओं  से लेकर छोटे कार्यकर्ताओं तक को महारानी जी की यह मुस्कराहट आम जनता के हित करने से पैदा हुई लगती हे , परन्तु विरोधी पक्ष के लोगो को जनता के धन को लूटने से पैदा हुयी खुसी की कुटिल मुस्कराहट लगती हे, आम जनता हमेशा की तरह बार बार  लुटते  पीटते रहने के बाद भी महारानी जी की मुस्कराहट का रहस्य जानने की नाकाम कोशीस में लगी ह, महारानी जी जब भी  किसी समाचार चेनल के माध्यम से जनता को दर्शन देती हे, मुस्कराती ही दिखती हे, देश की हालत बद  से बदतर होती जा रही हे, जनता भ्रस्टाचार , मंहगाई व आतंकवाद से त्रस्त हे, बढती बेरोजगारी से देश का युवा अपराध को रोजगार बनारहाहे. फिर भी महारानी जी मुस्करा रही हे. 
महारानी जी के दल के बड़े बड़े नेताओं के बड़े बड़े घोटालों की लम्बी फेहरिस्त में एक नया मोती जोड़ते हुए एक नया घोटाला हेलीकॉप्टर घोटाले के रूप में सामने आया हे. देश की जनता का करोडो रुपया फिर से लुट लिया गया, महारानी जी की मुस्कान कायम हे, कहीं दर्द,परेशानी अफ़सोस  या देश की जनता के प्रति दुःख जेसे कोई चिन्ह उनके चेहरे पर नहीं दीखते, शायद महारानी की नजरों में यह सामान्य घटना हे, आजादी के बाद से महारानी जी के परिवार का ज्यादातर समय राज रहा हे, तथा अबतक हुए अनगिनत घोटालो में उनके परिवार के सदस्यों की सीधे या  उनकी पार्टी के हरदम हाथ जोड़े नतमस्तक खड़े रहने वाले नेताओं के माध्यम हिस्सेदारी जरुर रही होगी, क्योंकि यह तो कोई मान ही नहीं सकता की महारानी की पार्टी में उनकी आज्ञा या जानकारी के बिना किसी की यह ओकात हे की वह कुछ भी कर सके. जेसे जेसे नए नए घोटाले जनता के सामने आते हे, महारानी जी के चेहरे की मुस्कान बढती जाती हे. 
महारानी जी मुस्काये भी क्यों नहीं, वो जानती हे, जेसे ही कोई घोटाला सामने आएगा, जिसमे उनके ससुराल हो चाहे उनके विदेशी पीहर के दोस्तों या पार्टी के लोगों पर आरोप लगेंगे उनकी पार्टी की कीचड़ उछालु,चीख चीख कर उलजलूल बकबक करने में महारत हासिल नेताओं की टोली तुरंत सक्रीय होकर या तो घोटालो सही साबित करने या अपनी पार्टी को  पाक साफ बताने के कुतर्क देने लग जायेगी . या फिर घोटाले का  बहुत मामूली कोई सम्बन्ध विरोधी दल में ढूंढने में लगकर,घोटाले का नहीं  किसी भी तरह का संबंध मिलने पर पूरा दोस विरोधिओं पर मढने में अपनी सारी  उर्जा लगा देंगे . अगर विरोधी पार्टी से किसी घोटाले का सम्बन्ध नहीं मिला तो इन हुल्लड़बाज नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ता,क्योंकि महारानी जी ,उनके देशी विदेशी परिवार या पार्टी के घोटाले बाजो को तथा अन्य आरोपियों को बचाने का एकमात्र काम करते करते ये इतने बेशर्म हो चुके हे, की अपने अरबों के अनगिनत घोटालो को दबाने या प्रत्येक नए घोटाले से अपने को पाकसाफ साबित करने  के लिए विरोधी पक्ष के लोगों के करोड़ों के चंद घोटालों को चिल्ला चिल्ला कर बार बार बताते रहेंगे , समाचार चेनलों पर इस तरह की चर्चा करने पर बिना रुके न केवल अपने समय बोलते रहते हे, बल्कि दुसरे के समय पर भी बिच में जोर जोर से बोलते रहते हे, रोकने पर भी नहीं मानते किसी भी तरह समय पूरा करवा देते हे।
वेसे महारानी मुस्कराये भी क्यों नहीं, महारानी जानती हे, यह चमचों या बिरुदावली गाने वाले भांड टाइप लोगों के पार्टी हे, किसी का  भी कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं हे,परजीवी कीड़े या बेल की तरह उनके नाम से जुड़े रहने से उनको रोजीरोटी नसीब हे, महारानी के परिवार के छोटे से छोटे सदस्य का गुणगान कर,पराधिनता में सुख महसूस करने वाले लोगो का जमावड़ा ही उनकी पार्टी हे. यहाँ किसी को कोई पद उसकी योग्यता या क़ाबलियत से नहीं, महारानी की मेहरबानी, या महारानी की चापलूसी करने से मिलता हे, देश का दुर्भाग्य हे की प्रधानमंत्री जेसे सर्वोच्च पद से लेकर किसी भी मंत्री पद पर बेठा व्यक्ति यह कहने में गर्व महसूस करता हे की यह पद मुझे महारानी के आशीर्वाद से मिला हे. उच्च मंत्री पदों पर नकारा लोगो की भरमार हे, देश की जनता त्रस्त हे, मंहगाई, भ्रस्टाचार व सरकारी लुट से परेशान हे,आतंकवाद चरम पर हे, कानून व्यवस्था चोपट हे, देश जल रहा हे, महारानी बिरुदावली सुन सुन कर नीरो की तरह  चेन की बांसुरी बजा रही हे, कुटिलता से मुस्करा रही हे. 
अनगिनत घोटालों से हो रही पार्टी की बदनामी, बढ़ते भ्रस्टाचार व मंहगाई से पार्टी की गिरती साख, के बावजूद भी महारानी जी का हमेशा मुस्कारते रहना गलत भी तो नहीं हे, क्योंकि महारानी जानती हे की जब कोई घोटाला सामने आएगा, उनकी पार्टी की कीचड़ उछालू  , उल जलुल बकबक कर सच्चाई को नकारने में महारत हासिल लेकिन समाचार चेनलो की सर्वाधिक पसंद चमचो की टोली तरह तरह के कुतर्क देकर या तो विरोधी दल के  लोगो या अपनी ही समर्थक दल के लोगो पर सारा दोस जड़ देङ्गे. या घोटाला उजागर करने वाली संवेधानिक संस्था पर कीचड़ उछालेंगे, उन्हें उनकी ओकात में रहने की नसीहत देंगे। 
या फिर अपने हाथ की कत  पुतली संस्थाओं को जाँच सोंप कर या तो लम्बे समय तक मामले को लटका देंगे, या अपने लोंगो को बचाने में उसका उपयोग करेंगे, जब इतना सब महारानी जी के इशारे भर से उनके लोग बढ़चढ़ कर करने लग जाते हो तो भला महारानी जी क्यों न मुस्कराए . 
महारानी जी की मुस्कराहट महारानी जी पर फ़िदा रहने वाले समाचार चेनलों की वजह से भी हे. कई बार तो समाचार चेनल जिस तरह महारानी जी व युवराज के गुणगान को इतने लालायित लगते हे की यह समझना कठिन होता की ये निष्पक्ष समाचार चेनल हे, या महारानी की बिरुदावली गाने वाले चमचे . महारानी के पक्ष में उनकी हल्ला बिग्रेड के नेताओं को तो यह जोर जोर से लम्बा लम्बा बोलने देते हे, परन्तु जब विरोधी पक्ष के लोग सच्चाई को सामने ला  कर महारानी या उनकी पार्टी की पोल खोल कर उनकी बखिया उधेड़ने लगते हे तब महारानी की पार्टी के लोग बिच में ही चिल्ला चिल्ला कर बोलना शुरू कर देते तब चेनल के एंकर या उनके सहयोगी न तो इनको रोकने की कोशिस करते हे, बल्कि कई बार तो खुद भी लगातार बोलना शुरू कर देते ताकि जनता महारानी की असलियत सुन व समझ न सके. 
महारानी जी की मुस्कान लगातार कायम हे, जब तक महारानी जी की पार्टी को सहयोग देकर सत्ता में बनाये रखने वाले स्वार्थी व लालची नेता रहेंगे, जो न सिर्फ खुद भ्रस्ट व जनता के धन के लुटेरे हे, बल्कि अपने स्वार्थ के लिए जनता को धोका देने में सिद्धहस्त हे,महारानी जी इनके सभी काले  कारनामों की पूरी जानकारी रखती हे, तथा महारानी जी के इशारों पर कार्य करने को मजबूर सरकारी जाँच एजेंसिओं की जाँच के डर से महारानी जी जेसे नचाना चाहे नाचने को तेयार हे,या मजबूर हे। मक्कारी से धर्मनिरपेक्षता का  ढोंग कर जनता को भूख, गरीबी व मंहगाई के दलदल में धकेलने को तत्पर रहते हे. 
महारानी जी का मुस्कारते रहना कंही वाजिब भी लगता हे, क्योंकि की महारानी जी जानती हे, की प्रमुख विरोधी पार्टी के नेता जो सब तरह से योग्य होने पर भी पद के लालच में एक दुसरे की टांग खिचते रहते हे, अपने को दुसरे से ज्यादा श्रेष्ठ मानने की होड़ में पार्टी की बदनामी की चिंता नहीं करते, अपना अहंकार पार्टी से ऊपर मानते हे, एसे  नेताओं की वजह से पार्टी देश के सर्वाधिक लोकप्रिय व योग्य व्यक्ति को सर्वोच्च पद का प्रत्याक्षी घोषित करने का निर्णय नहीं कर पाती,ऐसे केकड़ा प्रवृति के नेताओं वाली विरोधी पार्टी, अपने स्वार्थ को देश हित व जनता के हित से ऊपर मानने वाले अन्य दलों के लोगो की वजह से महारानी जी निश्चिंत हे की कोई उनकी पार्टी की जगह नहीं आ सकेगा . 
देश के ऐसे दुर्भाग्य  पूर्ण हालातों की वजह से जनता लुटती, पिटती तथा मरती रहेगी, महारानी जी मुस्कराहट दिनोदिन बढती रहीगी, देश का धन लुट कर भी महारानी जी व उनकी पार्टी के लोग मजे करते रहे गे.